प्रदेश में मानसून की एंट्री की तारीख नहीं, जुलाई और अगस्त की बारिश तय करती है पूरा सीजन

मानसून में देरी के बाद भी कई बार राजस्थान में हुई रिकॉर्ड बारिश

प्रदेश में मानसून की एंट्री की तारीख नहीं, जुलाई और अगस्त की बारिश तय करती है पूरा सीजन
मानसून इस बार सुस्त गति से आगे बढ़ रहा और अगले सप्ताह तक पहुंचने की संभावना। मौसम विभाग ने सामान्य से करीब 10% कम बारिश का अनुमान जताया। पिछले 30 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि देरी या जल्दी आने से बारिश तय नहीं होती।

जयपुर। राजस्थान में इस बार मानसून की चाल सुस्त है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 25 जून को मानसून की एंट्री होती है, लेकिन इस बार अगले सप्ताह तक मानसून के प्रदेश में प्रवेश करने की संभावना है। साथ ही सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान भी जताया गया है। हालांकि पिछले 30 वर्षों यानी 1996-2025 के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि मानसून का देर से पहुंचना हमेशा कम बारिश का संकेत नहीं होता। कई बार देर से आया मानसून रिकॉर्ड तोड़ बारिश देकर गया, जबकि समय से पहले पहुंचने पर भी सूखे जैसे हालात बने।

तय तारीख पर सिर्फ दो बार पहुंचा मानसून :

पिछले तीन दशक में मानसून केवल दो बार तय समय यानी 25 जून के आसपास राजस्थान पहुंचा। इस दौरान 15 बार समय से पहले और 13 बार देरी से मानसून ने दस्तक दी। सबसे खास बात यह रही कि तय समय पर पहुंचे दोनों मानसून 2023 और 2024 में सामान्य से ज्यादा बारिश देकर गए। वहीं देरी से आए 13 मानसून में से 7 ने सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज कराई।

8 दिन लेट आया, फिर भी बरसा रिकॉर्ड :

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साल 2012 में मानसून सबसे ज्यादा 8 दिन की देरी से पहुंचा। शुरुआत में चिंता बढ़ी लेकिन अगस्त की तेज बारिश ने पूरे सीजन की भरपाई कर दी और सामान्य से 11 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। वहीं 2019 में मानसून 7 दिन देरी से आया लेकिन प्रदेश में 550 मिमी से ज्यादा बारिश हुई, जो तीन दशक का रिकॉर्ड थी। मानसून ने पहले ही दिन राजस्थान के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर लिया। वर्ष 2014 में भी 7 दिन की देरी रही लेकिन बारिश लगभग सामान्य रही।

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5 दिन तक की देरी में आधे साल ज्यादा, आधे साल कम बरसा :

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30 साल में 10 बार मानसून 1 से 5 दिन की देरी से पहुंचा। इनमें 5 बार सामान्य से अधिक और 5 बार सामान्य से कम बारिश हुई। हालांकि 2002 और 2009 में 4-4 दिन की देरी के साथ सूखे जैसे हालात बने। वहीं 2006 में केवल 2 दिन की देरी के बावजूद बाड़मेर में बाढ़ आ गई।

जल्दी आया मानसून भी हर बार मेहरबान नहीं रहा :

आम धारणा है कि जल्दी आने वाला मानसून ज्यादा बरसता है, लेकिन रिकॉर्ड इससे अलग कहानी कहते हैं। वर्ष 1999 में मानसून एक दिन पहले आया लेकिन 25 प्रतिशत कम बारिश हुई। वर्ष 2004 में तीन दिन पहले पहुंचने के बावजूद 22 प्रतिशत कम वर्षा हुई। वहीं 2025 में मानसून 7 दिन पहले पहुंचा और 64 प्रतिशत अधिक बारिश के साथ 108 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। साथ ही 2021 में भी 7 दिन पहले एंट्री हुई और 17 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

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