पेपर लीक पर नकेल : आजीवन कारावास का प्रावधान, दस करोड़ तक का जुर्माना ; राजस्थान में चार साल पहले ही बन गया था कानून

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने बनाया था सख्त अधिनियम

पेपर लीक पर नकेल : आजीवन कारावास का प्रावधान, दस करोड़ तक का जुर्माना ; राजस्थान में चार साल पहले ही बन गया था कानून
भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए राजस्थान में प्रभावी कानून लागू है। इसमें दोषी परीक्षार्थियों को परीक्षाओं से बेदखल करने, संगठित गिरोहों के लिए न्यूनतम दस वर्ष से आजीवन कारावास तथा दस करोड़ रुपये तक के जुर्माने और संपत्ति कुर्क करने के कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं।

जयपुर। राजस्थान में पेपर लीक पर लगाम लगाने के लिए चार साल पहले ही कानून बन गया था। इस कानून में आजीवन कारावास के साथ ही दस करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। 

इसलिए पड़ी इस कानून की जरूरत

राजस्थान में वर्ष 2017 से 2022 के बीच रीट, पटवारी, सब-इंस्पेक्टर सहित कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के बड़े मामले सामने आए थे। इन घटनाओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ था और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर कई सवाल उठे थे। तब तत्कालीन प्रतिपक्ष भाजपा ने अशोक गहलोत सरकार को बुरी तरह घेर लिया था। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कठोर कानून बनाकर संगठित परीक्षा माफिया, पेपर लीेक गिरोह और फर्जी अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया था। 

यह बनाया गया कानून

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इसके लिए राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के अध्युपाय) अधिनियम, 2022 बनाया गया। इस कानून को विधानसभा के बजट सत्र में  पेश किया। चर्चा के बाद इसे पांच अप्रैल 2022 को विधानसभा ने ध्वनि मत से पारित किया था। उसी दिन राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद दूसरे दिन 6 अप्रैल को अधिसूचना जारी की गई। यह कानून 12 अप्रैल 2022 से पूरे राज्य में  प्रभावी हो गया था।  इस कानून की धारा (10) में अपराध की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग सजा का प्रावधान किया गया था। 

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ये हैं सजा के प्रावधान

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1.सामान्य परीक्षार्थी द्वारा अनुचित साधन अपनाने पर अधिकतम तीन साल तक का कारावास, कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना और जुर्माना नहीं भरने पर 9 माह तक का अतिरिक्त कारावास। 

2. पेपर लीक, संगठित नकल, सॉल्वर गैंग, षड्यंत्र या भर्ती परीक्षा में धांधली करने वालों पर न्यूनतम पांच साल से लेकर 10 साल तक की कैद। इसके साथ ही न्यूनतम 10 लाख से लेकर 10 करोड़ का जुर्माना। जुर्माना नहीं भरने पर दो साल तक का अतिरिक्त कारावास

एक साल बाद सजा को किया कठोर:-

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने एक साल बाद सन् 2023 में इस कानून में संशोधन करते हुए न्यूनतम 10 साल से लेकर आजीवन कठोर सजा का प्रावधान किया। दोषी परीक्षार्थी को दो साल तक सार्वजनिक परीक्षाओं में बैठने से वंचित और अपराध से अर्जित संपत्ति को कुर्क और जब्त करने का प्रावधान किया गया। 

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