फैटी लिवर स्क्रीनिंग में राजस्थान अव्वल : बीते साल 2.61 करोड़ में 31.02 लोग ग्रसित, मिशन ओवी लॉस चलेगा
जिला अस्पताल स्तर पर भी 13,021 लोगों की स्क्रीनिंग
जयपुर। खान-पान और बिगड़ी दिनचर्या से फैटी लिवर बीमारी देश-प्रदेश में बढ़ती जा रही है। प्रदेश में फैटी लिवर की बीमारी का समय पर पता लगाने और इलाज के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से मिशन लिवर स्माइल के तहत 63 जिला अस्पतालों में क्लीनिक संचालित है। जहां अब तक 2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग हुई जो देश में सबसे ज्यादा है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इनमें से 31.02 लाख लोग फैटी लिवर से ग्रसित मिले हैं या इसकी दहलीज पर हैं। 2026 में अब तक 1.32 लोगों में से 17.44 लाख लोग ग्रसित मिल चुके हैं। पीएचसी-सीएचसी स्तर पर अब तक 26 लाख 54 हजार 556 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिनमें 2 लाख 38 हजार 910 लोग संदिग्ध पाए गए। जिला अस्पताल स्तर पर भी 13,021 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।
इसे लेकर स्वास्थ्य भवन में दिल्ली के जाने माने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के डॉ. शिव सरीन की अध्यक्षता में फैटी लिवर बीमारी को लेकर बैठक हुई। जिसमें प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ सहित आला अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सामने आया कि बच्चों में भी गलत खान पान के चलते यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्कूलों में बच्चों की स्क्रीनिंग होगी। उनका वजन, लंबाई और कमर की साइज के आधार पर ऐसे में बच्चों को चिह्नित कर उन्हें अभी से इस बीमारी से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसे आरबीएसके और आरकेएसके कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों में मोटापे और मेटाबॉलिक जोखिम की समय पर पहचान की जा सकेगी। बैठक में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग, उपचार, प्रशिक्षण और आगे की कार्ययोजना को लेकर चर्चा हुई।
लीवर डिजीज रजिस्ट्री तैयार होगी
ऑनलाइन डैशबोर्ड से लीवर डिजीज रजिस्ट्री तैयार की जाएगी। इससे मरीजों की जानकारी और उपचार की स्थिति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश में बायो बैंक की संभावना पर भी विचार किया जाएगा। गायत्री राठौड़ ने बताया कि मिशन के तहत 150 नोडल अधिकारियों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा करीब 10 हजार मेडिकल ऑफिसर एवं कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को ऑलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। स्क्रीनिंग में मिले ग्रसित लोग इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। उनके कारणों का भी अध्ययन कराया जाएगा। उसके अनुरूप कार्ययोजना बनेगी।

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