सड़क हादसे रोकने की कवायद, हैवी लाइसेंस के लिए अब ट्रैक पर होगी अग्निपरीक्षा
हादसों में कमी लाने के लिए परिवहन विभाग का बड़ा बदलाव
जयपुर। राजस्थान में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग अब भारी वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को सख्त करने जा रहा है। प्रदेश में पहली बार भारी वाहनों के ड्राइविंग ट्रायल के लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक बनाए जाएंगे। इसके लिए राज्य के 10 परिवहन कार्यालयों में ट्रायल ट्रैक और ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर विकसित किए जाएंगे। इन पर भारी वाहन चलाने के लाइसेंस के आवेदकों की ड्राइविंग क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
फिलहाल, प्रदेश के किसी भी आरटीओ या डीटीओ कार्यालय में भारी वाहनों के लिए ऑटोमेटेड ट्रायल ट्रैक नहीं है। हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदकों की ट्रायल मैन्युअली परिवहन निरीक्षक लेते हैं। निरीक्षक अपने स्तर पर वाहन चलाने की क्षमता का परीक्षण कर आवेदक को पास या फेल करते हैं। इस व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं।
इसके विपरीत प्रदेश के 13 आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों में लाइट मोटर व्हीकल के लाइसेंस के लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक पहले से संचालित हैं। कंप्यूटराइज्ड ट्रैक पर निर्धारित मानकों के अनुसार ट्रायल में सफल होने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है।
भारी वाहनों के लिए क्यों जरूरी बदलाव :
भारी वाहनों के कारण होने वाले सड़क हादसों को देखते हुए विभाग का मानना है कि इनके चालकों की ड्राइविंग क्षमता का वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से परीक्षण जरूरी है। नए ट्रैक शुरू होने के बाद निरीक्षक के स्वविवेक की भूमिका कम होगी और आवेदक को निर्धारित मानकों पर खरा उतरना होगा। इससे हैवी ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करना पहले की तुलना में कठिन होगा।
प्रशिक्षण के साथ होगी ट्रायल :
10 परिवहन कार्यालयों में केवल ट्रायल ट्रैक ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि व्यावसायिक भारी वाहन चालकों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी। ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक विकसित किए जाएंगे। यहां आवेदकों को प्रशिक्षण देने के साथ लाइसेंस के लिए ड्राइविंग टेस्ट भी लिया जा सकेगा।
13 कार्यालयों के पुराने ट्रैक भी सुधरेंगे :
लाइट मोटर व्हीकल के लिए पहले से संचालित 13 आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों के ऑटोमेटेड ट्रायल ट्रैक के आधारभूत ढांचे की भी मरम्मत होगी। ट्रैक पर जरूरी सुविधाओं के साथ वातानुकूलित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए रोड सेफ्टी फंड से 8.10 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

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