वैलेंटाइन डे 2026 : आई लव यू नहीं, आई रेस्पेक्ट यू! जेन-जी के लिए गिफ्ट से ज्यादा मायने रखते हैं : स्पेस, कन्सेंट और इक्वल बिल
क्या यह नई पीढ़ी प्रेम को हल्का लेती है?
वैलेंटाइन डे पर जेन-जी का बदलता प्रेम नजर आया। युवा जोड़े ‘प्रपोज’ से ज्यादा ‘पार्टनरशिप’, स्पेस, कंसेंट और बराबरी को महत्व दे रहे हैं। डिजिटल शुरुआत के बावजूद वे ऑफलाइन समझ और सम्मान को असली कसौटी मानते हैं। उनका कहना है-प्रेम पाने का नहीं, साथ मिलकर बनने का नाम है।
जयपुर। यह शहर से दूर एक सुंदर पार्क में अठखेलियाँ करती फाल्गुन की सुनहरी धूप है। घास पर बैठे दो युवा। किताबें खुली हैं पर नजरें एक-दूसरे पर टिकी। वह कहती है, ‘तुम मेरे सिलेबस में नहीं थे, पर लाइफ-लॉन्ग सब्जेक्ट बन गए।’ वह हँसकर जवाब देता है, ‘तुम नोट्स नहीं, मेरी नैरेटिव हो।’ यह प्रेम कविता नहीं, बातचीत है। हल्की, चुटीली, लेकिन गहरी। उनसे पूछा जाता है कि अब वैलेंटाइन डे पर नया क्या है? लड़का-लड़की एक साथ जवाब देते हैं, आई रेस्पेक्ट यू! लगता है, यह बनावटी बात है।
यह विधानसभा के पास का एक कैफे है। नियॉन लाइट्स के बीच एक सेल्फी, कैप्शन तैयार। वे इंस्टा पोस्ट करते हैं : ‘नो ड्रामा, जस्ट अस!’ वह लिखती है, ‘तुम मेरे पासवर्ड नहीं पूछते, इसलिए मैं तुम्हें अपने सारे राज बता देती हूँ।’ वह कहता है, ‘तुम्हारी आजादी ही मेरा कमिटमेंट है।’ उनकी तरफ एक प्रश्न आता है कि आप दोनों प्रेम करते हैं? जवाब आया, नहीं। तो? हम एक दूसरे की रेस्पेक्ट करते हैं।
जयपुर बदल रहा है। जयपुर के वैलेंटाइन बदल रहे हैं। जेन-जी का प्रेम ‘प्रपोज’ के घुटनों पर नहीं, ‘पार्टनरशिप’ के कंधों पर खड़ा है। यहाँ ‘बेबी, तुम कहाँ हो?’ की जगह ‘सेफ पहुँचे?’ है। यहाँ गिफ्ट से ज्यादा मायने रखता है : स्पेस, कन्सेंट, और इक्वल बिल।
दिलचस्प यह है कि इन दोनों रिश्तों की शुरूआत डिजिटल थी। एक ऑनलाइन गेमिंग चैट से, दूसरा इंस्टाग्राम डीएम से। लेकिन दोनों मानते हैं कि असली परीक्षा ऑफलाइन धैर्य की है। ‘रील पर सब प्यारा लगता है,’ वह कहती है, ’पर असली टेस्ट तब है जब तुम मेरे गुस्से को भी उतनी ही शांति से सुनो।
इन युगल की तस्वीरों में कोई ओवरड्रामैटिक पोज नहीं, कोई फिल्मी गुलदस्ता नहीं-बस आँखों में वह भरोसा, जो कहता है: ‘तुम मुझे बदलने नहीं, समझने आए हो।
क्या यह नई पीढ़ी प्रेम को हल्का लेती है? या फिर वही पीढ़ी है, जिसने प्रेम को सबसे गंभीरता से परिभाषित किया है-बराबरी, संवाद और सम्मान के साथ? इस वैलेंटाइन का असली टॉकिंग पॉइंट शायद यही है: ‘हम तुम्हें पाने के लिए नहीं, तुम्हारे साथ बनने के लिए प्यार करते हैं।’ और शायद पहली बार, प्रेम सिर्फ़ एहसास नहीं—एक साझा, सजग, और साहसी निर्णय है।

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