पधारो म्हारे देश… साहित्य, संस्कृति और विचारों का उत्सव बना जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, सीएम शर्मा- गुलदस्ते नहीं, ज्ञान की खुशबू फैलाने वाली पुस्तकें देनी चाहिए सम्मान में

परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम दिखाई देता है

पधारो म्हारे देश… साहित्य, संस्कृति और विचारों का उत्सव बना जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, सीएम शर्मा- गुलदस्ते नहीं, ज्ञान की खुशबू फैलाने वाली पुस्तकें देनी चाहिए सम्मान में
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया। उन्होंने आमजन से साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़कर योगदान देने की अपील की। सीएम ने कहा कि पुस्तक ज्ञान बांटती है और समाज को दिशा देती है। उन्होंने राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

जयपुर। राजस्थान की अतिथि-सत्कार की परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल एक बार फिर देखने को मिला। “पधारो म्हारे देश” की भावना के साथ इस मंच पर देश-विदेश के विद्वान, लेखक और विचारक एकत्र हुए और अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आमजन से देश-प्रदेश की संस्कृति और साहित्य से अधिक से अधिक जुड़कर इसके विकास में अपना अमूल्य योगदान देने की अपील की।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान हमेशा से साहित्य, कला और विचारों की भूमि रहा है, जहां परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।

सीएम शर्मा ने कहा कि सम्मान के प्रतीक के रूप में गुलदस्ता नहीं, बल्कि पुस्तक भेंट की जानी चाहिए। गुलदस्ता कुछ दिनों में मुरझा जाता है, लेकिन पुस्तक वर्षों तक ज्ञान बांटती है और समाज को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि साहित्य मनुष्य को सकारात्मक सोचने की शक्ति देता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

मुख्यमंत्री ने राजस्थान की विविधताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महल, किले, हवेलियां, रेगिस्तान, झीलें, अभ्यारण्य और बर्ड सेंचुरी प्रदेश की पहचान हैं, जिन्हें देखने दुनियाभर से लोग आते हैं। पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने पेड़, नदियों और पहाड़ों की पूजा कर प्रकृति को सम्मान दिया है। इस विरासत को सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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