अमावस्या को मतदान, ज्योतिष के अनुसार ठीक नहीं : दोनों ही तिथियों को शुभ कार्य नहीं किए जाते, किस घड़ी, मुहूर्त और नक्षत्र में हुई चुनाव की घोषणा
एकादशी के बाद चंद्रमा की कलाएं लगातार क्षीण होती जाती हैं
जयपुर। राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव की तिथि 9 और 11 सितम्बर को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ठीक नहीं माना जा रहा है। विद्वानों का कहना है कि 9 सितम्बर को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और 11 सितम्बर को अमावस्या हैं, ऐसे में दोनों ही तिथियों को कोई मांगलिक, शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। उनका मानना है कि दीपावली के अलावा देश में कोई भी त्यौहार अमावस्या को नहीं मनाया जाता है। योतिषाचार्य प्रो.विनोद शास्त्री कहते हैं कि कृष्ण पक्ष में एकादशी के बाद चंद्रमा की कलाएं लगातार क्षीण होती जाती हैं और अमावस्या पर चंद्रमा की कलाएं समाप्त मानी जाती हैं।
किस घड़ी, मुहूर्त और नक्षत्र में हुई चुनाव की घोषणा
चुनाव की घोषणा 19 अगस्त को हुई, उस दिन बुधवार और स्वाति नक्षत्र था। शुक्ल पक्ष की सप्तमी और प्रेस वार्ता दोपहर चार से साढ़े पांच बजे तक हुई, वह शुभ का चौघड़िया और विजय मुहूर्त था।
इनका कहना है
कोई भी नया कार्य इन तिथियों पर नहीं किया जाता हैं, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया पूर्व से चल रही है। आदर्श आचार संहिता लगना, चुनाव की अधिसूचना जारी होना अर्थात चुनाव को लेकर कार्य किया जा रहा है। हालांकि,यह सच है कि इन दोनों तिथियों को मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इन तिथियों से कोई भी कार्य करने से बचना चाहिए।
-डॉ.महेन्द्र मिश्रा, ज्योतिषाचार्य, जयपुर
अमावस्या को कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए, ऐसी मान्यता हैं। लेकिन चुनाव की प्रक्रिया पूर्व से ही चल रही है। ऐसे में कार्य हो सकते हैं। चुनाव आयोग को विचार करना चाहिए, यदि तिथियों में बदलाव किया जाए तो अच्छा होगा। चुनाव का कार्य काफी कुछ काफी दिनों से चल रहा है, अब उसमें कई तिथियां भी आएंगी।
-पण्डित अनीष व्यास, ज्योतिषाचार्य,जोधपुर

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