जब कट गया नीम का पेड़ तो छलक पड़े आंसू : ‘पतंग और पेड़’ ने विश्व पर्यावरण दिवस पर छुआ हर दिल
नाटक की प्रेरणा उनके बचपन के अनुभवों से मिली
जयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नाटकवाला कला मंच, आमेर द्वारा प्रस्तुत बाल नाटक ‘पतंग और पेड़’ ने दर्शकों को भावुक कर दिया। प्रकृति संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित इस नाटक का लेखन एवं निर्देशन रंगकर्मी ओम प्रकाश सैनी ने किया। नाटक की कहानी दो बच्चों—गरीब बालक राजू और संपन्न परिवार के मोनू—के इर्द-गिर्द घूमती है। राजू के पास पतंग खरीदने के पैसे नहीं हैं, जबकि मोनू के पास सभी साधन हैं, लेकिन वह पतंग उड़ाना नहीं जानता। हर बार उसकी पतंग घर के बाहर खड़े नीम के पेड़ में फंस जाती है, जिससे परेशान होकर वह पेड़ कटवाने की जिद कर बैठता है। दूसरी ओर, राजू उसी पेड़ को अपनी खुशियों का साथी मानता है। जब पेड़ काट दिया जाता है तो उसका दर्द दर्शकों की आंखें नम कर देता है।
कहानी में भावनात्मक मोड़ तब आता है जब राजू निराश होने के बजाय उसी स्थान पर नया पौधा लगाने का संकल्प लेता है। उसकी सकारात्मक सोच मोनू और उसके पिता को अपनी गलती का एहसास कराती है। नाटक ने यह संदेश दिया कि पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन, यादें, खुशियां और आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद होते हैं। लेखक-निर्देशक ओम प्रकाश सैनी ने बताया कि नाटक की प्रेरणा उनके बचपन के अनुभवों से मिली है। प्रस्तुति में दीपशिखा, खुशांक, लक्षित, आयुष्मान, युग और अवनी ने प्रभावशाली अभिनय किया।

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