16 सप्ताह की गर्भवती ने पति के साथ जाने से किया इनकार
कोर्ट ने युवती से बंद कमरे में बातचीत की
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 सप्ताह की गर्भवती युवती को उसकी इच्छा के अनुसार उसके माता-पिता के साथ जाने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि युवती बालिग है, अपनी इच्छा से निर्णय लेने में सक्षम है और वह किसी भी प्रकार की अवैध हिरासत में नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने पति और उसके परिजनों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायाधीश रेखा बोराना की अवकाशकालीन के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से याचिका दायर कर युवती को कोर्ट के समक्ष पेश कर उसकी अभिरक्षा दिलाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने युवती को पुलिस के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने युवती के लगभग 16 सप्ताह की गर्भवती होने का मुद्दा उठाया, जिस पर कोर्ट ने युवती से बंद कमरे में बातचीत की। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बातचीत के दौरान युवती ने स्पष्ट और आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ जाना चाहती है तथा वर्तमान याचिकाकर्ता के साथ रहने की इच्छुक नहीं है।

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