पटेल के अटल इरादे से हुआ सोमनाथ का पुनर्निर्माण : यह भारत की अदम्य जिजीविषा और शाश्वत स्वाभिमान का प्रतीक, शेखावत ने कहा- आक्रांताओं ने संस्कृति को कुचलने का रचा था षड्यंत्र
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमें अपनी ऐतिहासिक विजय एवं संघर्ष की बात बताता है
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सोमनाथ मंदिर को भारत की अदम्य जिजीविषा और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हजार वर्षों के हमलों के बावजूद भारत की चेतना जीवित रही। शेखावत ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को ऐतिहासिक संघर्ष और विजय की स्मृति बताया तथा 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।
जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सोमनाथ मंदिर को धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की अदम्य जिजीविषा और शाश्वत स्वाभिमान का प्रतीक बताया है और कहा है कि हजार साल पहले आक्रांताओं ने भारत की संस्कृति को कुचलने का षड्यंत्र रचा था, लेकिन भारत हर बार पूरी ताकत के साथ उठ खड़ा हुआ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमें अपनी ऐतिहासिक विजय एवं संघर्ष की बात बताता है।
शेखावत ने हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज से ठीक हजार साल पहले गजनी के सुल्तान महमूद ने सोमनाथ पर आक्रमण किया था। तीन दिनों के कड़े संघर्ष के बाद 11 जनवरी 1026 को मंदिर को ध्वस्त किया गया था। हजार साल की इस यात्रा में आक्रांताओं ने बार-बार इस प्रतीक को खंडित करने का प्रयास किया लेकिन भारत की चेतना को समाप्त नहीं कर सके। स्वतंत्रता के बाद के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि आजादी के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को रोकने की पूरी चेष्टा की थी। उनके कड़े विरोध के बावजूद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अटल इरादे और सामाजिक सहयोग से इस गौरव का पुनरुद्धार हुआ। संयोग से इस वर्ष जहां गजनवी के आक्रमण के हजार वर्ष हो रहे हैं, वहीं मंदिर के पुनर्निर्माण के भी 75 वर्ष पूरे हुए हैं।
उन्होंने आह्वान किया कि सोमनाथ की यह पावन स्मृति हमारे मन में 2047 तक भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' बनाने के संकल्प को और अधिक गहरा करे। उन्होंने भगवान सोमनाथ और द्वारकाधीश से प्रार्थना करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति से भारत पुन: विश्व पटल पर अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक संप्रभुता स्थापित करेगा।
शेखावत ने राजस्थान और विशेष रूप से माहेश्वरी समाज के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इस समाज ने न केवल व्यापारिक द्दष्टिकोण से भारत को समृद्ध किया, बल्कि जहां भी प्रवासी के रूप में गए, वहां राष्ट्रवाद के विचार को परिपुष्ट किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण से लेकर देश के विभिन्न लोक कल्याणकारी प्रकल्पों को खड़ा करने में माहेश्वरी समाज सदैव अग्रणी रहा है। जोधपुर वासियों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि हमें ऐसे प्रखर राष्ट्रवादी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करने का अवसर मिला।

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