दुर्दशा का शिकार हो रहा मुखर्जी पार्क, फव्वारे चल रहे ना लाइट, रैलिंग भी गायब

पैदल चलने का पाथ वे क्षतिग्रस्त

दुर्दशा का शिकार हो रहा मुखर्जी पार्क, फव्वारे चल रहे ना लाइट, रैलिंग भी गायब

रखवाली के लिए चौकीदार लगा है लेकिन वह भी खुद को असहाय महसूस करता है।

कोटा। शहर में महापुरुषों के नाम पर पार्क व चौराहे बना तो दिए हैं लेकिन देखभाल व रखरखाव के अभाव में वे दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही एक पार्क है श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क। नयापुरा में बड़ तिराहे के पास मेन रोड पर स्थित है श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वर्ण जयंती पार्क। इस पार्क का निर्माण नगर निगम द्वारा कराया गया था। तत्कालीन महापौर सुमन श्रृंगी के समय में 9 अगस्त 1998 को क्रांतिधारी केसरी सिंह बारहठ की प्रतिमा स्थापित कर उसका अनावरण किया गया था। मूर्ति के चारों तरफ फव्वारे लगाए गए हैं। शुरूआत में तो ये चले लेकिन पिछले काफी समय से ये फव्वारे बंद हैं। यहां न तो पानी है और न ही फव्वारे चल रहे हैं। जिससे यहां आने वाले निराश होकर ही लौट रहे है। पार्क में लाइटें गायब है। गिनती ही लाइट जल रही हैं जिनकी रोशनी भी पर्याप्त नहीं है।

खुले बिजली बॉक्स,दीवार क्षतिग्रस्त
हालत यह है कि यहां बिजली के पैनल बॉक्स खुले पड़े हैं। पैदल चलने का पाथ वे क्षतिग्रस्त हो रहा है। इतना ही नहीं इसकी चार दीवारी पर लगी लोहे की आधी रैलिंग भी गायब हो गई है। पार्क के पीछे की चार दीवारी भी क्षतिग्रस्त हो रही है। जिससे वह कभी भी ढह सकती है।हालांकि नगर निगम की ओर से यहां रखवाली के लिए चौकीदार तो लगाया हुआ है। लेकिन वह भी खुद को असहाय महसूस करने के अलावा कुछ नहीं कर पाता।

शाम का समय घूमने का
लोगों ने बताया कि वे केएसटी पर घूमने के लिए आते हैं। शाम के समय यहां घूमने व मंदिर पर दर्शन करने के बाद सामने पार्क नजर आने पर वहां जाते हैं लेकिन वहां जाने पर निराश होकर ही लौटना पड़ रहा है। वहां न तो फव्वारे चल रहे हैं और न ही लाइटें जल रही हैं। जिससे वहां जाने का कोई फायदा नहीं है।

महापुरुषों की बेकद्री नहीं हो
नयापुरा निवासी दुगार्लाल जैन का कहना है कि नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से महापुरुषों के नाम पर पार्क व चौराहे बना तो दिए जाते हैं लेकिन उन पर फिर ध्यान नहीं दिया जाता। साल में एक बार माल्जार्पण करने के बाद पूरे साल उनकी बेकद्री होती रहती है। जबकि महापुरुषों व उनके नाम पर या तो पार्क व चौराहों का नाम नहीं रखा जाए। यदि रखते हैं तो उनकी पूरी सार संभाल व देखभाल होनी चाहिए।

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होगा विकास
इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि शहर के सभी छोखे-बड़े पार्कों का सर्वे कराया गया है। नगर निगम के अधीन वाले पार्क भी अब केडीए के अधिकार क्षेत्र में है। केडीए की ओर से सभी पार्कों का विकास व सौन्दर्यीकरण कराया जाएगा। उसके तहत इस पार्क को भी सही किया जाएगा।

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