20 करोड़ मिले तो बदले बायोलॉजिकल पार्क की सूरत

2 साल से बजट के अभाव में सुविधाओं को तरस रहा अभेड़ा, चिड़ियाघर में मौजूद वन्यजीवों को शिफ्टिंग का इंतजार, द्वितीय चरण में बनने हैं, 31 एनक्लोजर, वेटनरी हॉस्पिटल, कैफेटेरिया सहित अन्य कार्य

20 करोड़ मिले तो बदले बायोलॉजिकल पार्क की सूरत
बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, मगरमच्छ, बंदर व कछुए व ऐमु सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे।

कोटा। राजस्थान का सबसे बड़ा बायोलॉजिकल पार्क दो साल से बजट को तरस रहा है। बजट के अभाव में सुविधाएं विकसित नहीं हो पा रही। वहीं, रियासतकालीन चिड़ियाघर से वन्यजीवों की अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्टिंग भी नहीं हो पा रही। यहां न तो कैफेटेरिया है और न ही ई-रिक्शा। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को चाय नाश्ते के लिए भटकना पड़ता है। दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए। जबकि, वन्यजीव विभाग प्रशासन सरकार को कई बार प्रस्ताव भेज चुका है। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। इसके चलते एक दर्जन से अधिक वन्यजीव चिड़ियाघर से बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं हो पा रहे। बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, मगरमच्छ, बंदर व कछुए व ऐमु सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। एनक्लोजर की कमी के कारण चिड़ियाघर के वन्यजीवों की शिफ्टिंग अटक गई। 

कैफेटेरिया व ई-रिक्शा की खल रही कमी
वर्तमान में बायोलॉजिकल पार्क में कुल 64 वन्यजीव हैं, जिनमें 10 मांसाहारी और 54 शाकाहारी हैं। यहां आने वाले पर्यटक 52 रुपए खर्च कर पार्क में वन्यजीवों के दीदार को  आते हैं लेकिन इलेक्ट्रिकल व्हीकल नहीं होने से 3 किमी लंबे ट्रैक पर पैदल घूमना मुश्किल हो जाता है। वहीं, कैफेटेरिया सुविधा नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा पर्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड व वाटरकूलर भी र्प्याप्त नहीं हैं। पानी के लिए भी भटकना पड़ता है।   

आॅपरेशन या पोस्टमार्टम के लिए लगता  है16 किमी का चक्कर
वेटनरी हॉस्पिटल नहीं होने से वन्यजीवों के इलाज में परेशानी होती है। इलाज के संबंधित कुछ उपकरण बायोलॉजिकल पार्क में तो कुछ चिड़ियाघर में हैं। वन्यजीवों को यदि दवाइयां देनी हो तो यहां से दे देते हैं लेकिन आॅपरेशन या पोस्टमार्टम करना हो तो उसे करीब 16 किमी दूर नयापुरा स्थित चिड़ियाघर  लाना होता है। ऐसे में कई बार वन्यजीवों को समय पर इलाज मुहैया करवाना काफी चुनौतिपूर्ण हो जाता है। 

30 करोड़ से बना था बायोलॉजिकल पार्क 
डीसीएफ उड़नदस्ता अनुराग भटनागर ने बताया कि वर्ष 2017 में 30 करोड़ की लागत से बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जिसे 2019 में पूरा किया जाना था लेकिन कोविड के 2 साल के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद 21 नवम्बर 2021 को काम पूरा हुआ। 

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प्रथम चरण में ये हुए थे कार्य 
प्रथम चरण के तहत पार्क में 13 एनक्लोजर बनाए गए। इसके अलावा पाथ-वे, पर्यटकों के लिए सुविधाघर, छायादार शेड, कैफेटेरिया का थोड़ा कार्य, जल व्यवस्था के लिए टैंक सहित फेंसिंग करवाई गई। वहीं, अभी तक यहां करीब 25 हजार पौधे लगवा चुके हैं। 

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क्यों पास नहीं हो पा रहा बजट   
वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जाइका प्रोजेक्ट के तहत बायलोजिकल पार्क में अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर से रिव्यू प्रस्ताव भेजे गए, वह भी स्वीकृत नहीं हुए। गत वर्ष 4 जून को वन विभाग के शासन सचिव शिखर अग्रवाल के बायलॉजिकल पार्क निरीक्षण के दौरान समस्या से अवगत कराया था। इस पर उन्होंने जल्द ही बजट पास करवाने का भरोसा दिलाया था लेकिन दो साल बीतने के बाद भी बजट नहीं मिल पाया।   

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द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य 
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ की लागत से 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं। 

इसी वर्ष बजट मिलने की उम्मीद
द्वितीय चरण में बेहद महत्वपूर्ण काम होने थे, जो बजट के अभाव में नहीं हो सके। सरकार को पूर्व में प्रस्ताव भेजे गए हैं लेकिन अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ। अभी 31 एनक्लोजर बनने शेष हैं। इस कारण चिड़ियाघर से अन्य वन्यजीवों को बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं कर पा रहे। वहीं, वेटनरी हॉस्पिटल, स्टाफ  क्वार्टर, आॅडिटोरियम, इंटरपिटेक्शन सेंटर व कैफेटेरिया बनना पर्यटन की दृष्टि से जरूरी है। हालांकि, इसी वर्ष बजट मिलने की उम्मीद है। बायोलॉजिकल पार्क में सुविधाएं विकसित करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। 
-राजबिहारी मित्तल, एसीएफ वन्यजीव विभाग कोटा

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