अब भैंसरोडगढ़ सेंचुरी में तैयार होगी टाइगर की फूड चेन
वन्यजीव विभाग ने 1 करोड़ की लागत से 12.4 हैक्टेयर में बनाया प्रे-बेस एनक्लोजर
कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र भैंसरोडगढ़ सेंचुरी में अब बाघों के लिए जंगल के भीतर ही मजबूत फूड चेन तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। वन्यजीव विभाग ने यहां करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से 12.4 हैक्टेयर क्षेत्र में प्रे-बेस एनक्लोजर तैयार किया है, जो करीब 76 बीघा में फैला हुआ है। अब इसमें अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से चीतल शिफ्ट किए जाएंगे। इस संबंध में विभाग ने उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेज दिया है, स्वीकृति मिलने पर प्रे-बेस शिफ्ट किए जाएंगे।
लेपर्ड भी नहीं पहुंच पाएगा एनक्लोजर तक
चीतलों की सुरक्षा के लिए बनाए गए एनक्लोजर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि लेपर्ड भी नहीं पहुंच पाएगा। लेपर्ड प्रूफ एनक्लोजर की ऊंचाई करीब 12 फीट है और ऊपरी हिस्सा करीब 2 फीट बाहर की ओर 45 डिग्री के कोण पर झुका हुआ है। इससे तेंदुए के लिए बाड़ पर चढ़कर अंदर पहुंचना संभव नहीं होगा। एनक्लोजर में दो वाटर हॉल बनाए गए हैं, जबकि घास के मैदान भी विकसित कर दिए गए हैं।
8 मादा और 4 नर चितल होंगे शिफ्ट
जानकारी के अनुसार,अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से 12 चीतल शिफ्ट किए जाएंगे, जो 2-1 रेशो के तहत 8 मादा व 4 नर शामिल हैं। चीतलों के लिए पर्याप्त घास, पानी और सुरक्षित रहवास उपलब्ध होने से ब्रिडिंग बढ़ेगी। ऐसे में इनका जनसंख्या घनत्व मजबूत बनेगा।
एक ही साल में दोगुना बढ़ेगी संख्या
वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार, चीतल साल में दो बार ब्रिडिंग करते हैं और मादा एक बार में सामान्यत: दो बच्चों को जन्म देती है। अनुकूल परिस्थितियों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ सकेगी। जिन्हें चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। जिससे सेंचुरी में शाकाहारी वन्यजीवों संख्या बढ़ने से टाइगर सहित मांसाहारी वन्यजीवों के भोजन की उपलब्धता का आधार मजबूत होगा।
बजट घोषणा के तहत शुरू हुआ था काम
प्रे-बेस एनक्लोजर का निर्माण मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत कैंपा योजना में वित्तीय वर्ष 2025-26 में शुरू किया गया था। निर्माण कार्य मार्च 2026 में पूरा हुआ। अब अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से चीतल शिफ्ट करने की प्रक्रिया प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद शुरू होगी।
दिल्ली-भरतपुर पर निर्भरता घटेगी
वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार, अभी टाइगर रिजर्व में प्रे-बेस की जरूरत पूरी करने के लिए भरतपुर के घना क्षेत्र और दिल्ली के डियर पार्क जैसे बाहरी स्रोतों पर निर्भरता रहती है। भैंसरोडगढ़ में चीतलों की स्थानीय आबादी विकसित होने पर भविष्य में बाहर से प्रे-बेस लाने की जरूरत कम हो सकती है।
इनका कहना है
टाइगर के लिए मजबूत प्रे-बेस जरूरी
भैंसरोडगढ़ सेंचुरी, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र है। यहां टाइगर का मूवमेंट बढ़ाने और उसके लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित करने में पर्याप्त प्रे-बेस (चीतल-चिंकारा) होना महत्वपूर्ण है। ऐसे में विभाग का यह प्रयास भविष्य में केवल प्रे-बेस बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से टाइगर-लेपर्ड सहित अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी।
-एएच जैदी, नेचर प्रमोटर
उच्चाधिकारियों को भेजे प्रस्ताव
भैंसरोडगढ़ में प्रे-बेस एनक्लोजर बनकर तैयार हो चुका है। जिसमें अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से चीतलों को शिफ्ट करने की कार्ययोजना है, फिलहाल प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजे हैं, स्वीकृति मिलने पर ही पार्क से चीतल शिफ्ट किए जाएंगे। सुरक्षित रहवास, पर्याप्त भोजन और पानी मिलने से चीतलों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
-प्रमोद कुमार धाकड़, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा

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