वैश्विक मंच पर भारतीय कला की तलाश, कलाकारों ने साझा किए गहरे विचार
RIC में वरिष्ठ कलाकारों का मंथन
जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'इंडियन आर्ट ऑन द ग्लोबल स्टेज' विषय पर आयोजित कला संवाद में वरिष्ठ कलाकारों ने भारतीय कला की वैश्विक पहचान और भविष्य पर गहन विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नन्द लाल ठाकुर ने किया। कलाकार शैल चोयल ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, लेकिन कलाकारों को व्यापक मंच, संस्थागत सहयोग और बेहतर कर-व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तकनीक कला-बाजार में उपयोगी हो सकती है, लेकिन कलाकार की मौलिक कल्पना का कोई विकल्प नहीं।
अखिलेश वर्मा ने कहा कि सुंदरता की कोई राष्ट्रीय सीमा नहीं होती और कला भाषा, भूगोल की सीमाओं से आगे जाकर संवेदना से संवाद करती है। उन्होंने सुबोध गुप्ता और अनिश कपूर जैसे कलाकारों का उदाहरण भी दिया। वहीं जयन्ती रबाड़िया ने कहा कि नई तकनीक से डरने के बजाय उसके साथ सजग संवाद जरूरी है। कलाकारों के अनुसार भारतीय कला की असली ताकत उसकी विविधता और अपनी जड़ों से मिली दृष्टि में छिपी है।

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