हाड़ौती के 19 कॉलेजों में 316 शिक्षकों के पद खाली, बारां गवर्नमेंट कॉलेज की अजीब स्थिति, 60% से ज्यादा पद रिक्त

गणित से संस्कृत तक नहीं लगती कक्षाएं

हाड़ौती के 19 कॉलेजों में 316 शिक्षकों के पद खाली, बारां गवर्नमेंट कॉलेज की अजीब स्थिति, 60% से ज्यादा पद रिक्त

विद्यार्थी बोले-भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा उच्च शिक्षा विभाग ।

कोटा। हाड़ौती के 19 राजकीय महाविद्यालयों में  300 से ज्यादा शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। फैकल्टी के अभाव में शिक्षा से गुणवत्ता दूर होती जा रही है। हालात यह हैं, गणित से लेकर संस्कृत तक की कक्षाएं तक नहीं लग रही। नतीजन, विद्यार्थी बिना पढेÞ ही परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। जिसका असर गत वर्षों में परीक्षा परिणामों पर देखने को मिल चुका है। उच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण कई विद्यार्थी बैक की मार झेल रहे हैं। इधर, शिक्षाविदें का कहना है कि जब पढ़ाने को शिक्षक ही नहीं होंगे तो विद्यार्थी में विषयों की समझ विकसित होना संभव नहीं हो पाएगा। गणित, राजनेतिक विज्ञान जैसे विषयों की कक्षाएं नहीं लगना चिंता का विषय है। 

संभाग में सबसे ज्यादा बूंदी गवर्नमेंट कॉलेज में पद खाली
कोटा संभाग में सबसे ज्यादा शिक्षकों के पद राजकीय महाविद्यालय बूंदी में खाली हैं। यहां कुल 107 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से मात्र 53 कार्यरत हैं। जबकि, 54 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। जिससे मौजूद शिक्षकों पर वर्कलोड बढ़ रहा है। दो सेशनों के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाने पढ़ता है। नतीजन, यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार, 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना संभव नहीं हो पा रहा। शिक्षकों की आवाज क्लास में बैठे आखिरी बच्चों तक नहीं पहुंच पाती। जिससे उन्हें विषय के टॉपिक समझने में परेशानी होती है। 

बारां कॉलेज की अजीब स्थिति : 63 में 44 शिक्षक ही नहीं
हाड़ौती में उच्च शिक्षा की सबसे ज्यादा स्थिति गवर्नमेंट  बारां कॉलेज की है। यहां शिक्षकों के 63 पद स्वीकृत है, जिसमें से 44 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग प्रतिनियुक्ति निरस्त नहीं कर रहा। जबकि, बारां कॉलेज में आर्ट्स, साइंस व वाणिज्य संकाय संचालित हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं, हर छह की जगह तीन माह में सेमेस्टर एग्जाम हो रहे हैं। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में कोर्स ही पूरा नहीं हो पा रहा। 

महत्वपूर्ण विषयों की नहीं लगती कक्षाएं
जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बारां कॉलेज में गणित की शिक्षिका पिछले 2 साल से कोटा गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। जबकि, बारां कॉलेज में गणित का एक ही शिक्षक था, जिनके डेपुडेशन पर चले जाने से वह पद भी खाली हो गया। ऐसे में वहां गणित की कक्षाएं तक नहीं लगती। इसी तरह कोटा ग्रामीण के इटावा महाविद्यालय में लंबे वर्षों से 3 शिक्षक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी और संस्कृत के शिक्षक चुरू, मेडता सिटी और बस्सी जयपुर गवर्नमेंट कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यहां इन विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे में रे-सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। 

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6 दिन कोटा से इटावा-सांगोद में आती फैकल्टी तो लगती क्लास
शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय  पर एक रे-सेंटर बनाया गया है। यह सेंटर जिले में मौजूद सभी गवर्नमेंट कॉलेजों में से एक महाविद्यालय को रे-सेंटर बनाया जाता है। जिससे अन्य राजकीय महाविद्यालय जुड़े रहते हैं।   ऐसे में जिन कॉलेजों में सब्जेक्ट टीचर नहीं होता वहां प्राचार्य के आग्रह पर एक माह में 6 दिन के लिए शिक्षक भेजा जाता है। लेकिन, कोटा के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इटावा, सांगोद कॉलेजों में तीन से चार महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे में 6-6 दिन के लिए यहां रे-सेंटर से शिक्षक भेजे  जाते हैं। नतीजन, अधिकांश कॉलेजों में शिक्षक नहीं है, ऐसे में रे-सेंटर पर शिक्षक भेजने का भार बढ़ जाता है। जिसकी वजह से संबंधित कॉलेजोें को शिक्षकों के लिए 2 से 3 महीने तक का इंतजार करना पड़ जाता है। 

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गणित से राजनीतिक विज्ञान तक की कक्षाएं खाली
कॉलेज शिक्षा सहायक निदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बारां कॉलेज में गणित की शिक्षिका पिछले 2 साल से कोटा गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। जबकि, बारां कॉलेज में गणित का एक ही शिक्षक था, जिनके डेपुडेशन पर चले जाने से वह पद भी खाली हो गया। ऐसे में वहां गणित की कक्षाएं तक नहीं लगती। इसी तरह कोटा ग्रामीण के इटावा महाविद्यालय में लंबे वर्षों से 3 शिक्षक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी और संस्कृत के शिक्षक चुरू, मेडता सिटी और बस्सी जयपुर गवर्नमेंट कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यहां इन विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। हालांकि, रे-सेंटर से 6 दिन के लिए कोटा से फेकल्टी बुलानी पड़ती है। 

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क्या कहते हैं विद्यार्थी
कॉलेज में पिछले दो साल से राजनेतिक विज्ञान व हिन्दी की नियमित कक्षाएं नहीं लगी। सेमेस्टर प्रणाली के तहत हर तीन माह में एग्जाम हो रहे हैं। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में न तो परीक्षा की तैयारी होती है और न ही सिलेबस समझाया जाता है। मजबूरन, ट्यूशन व वन वीक सीरीज का सहारा लेना पड़ रहा है। 
- लोकेश मेहरा, प्रवीण छात्र, इटावा कॉलेज

एडमिशन व एग्जाम फीस देने के बाद भी राजनेतिक विज्ञान जैसे मुख्य विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे। बिना पढेÞ ही परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। परीक्षा में नम्बर कम आते हैं। शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम में भुगतना पड़ा है।  
- गौरव नायर, अंकित मीणा,  छात्र  सांगोद 

गवर्नमेंट आटर्Þ्स कॉलेज कोटा में शिक्षकों के 111 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 45 शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। जबकि, यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा महाविद्यालय है। इसके बावजूद विभाग द्वारा शिक्षकों के पदों को नहीं भरा जा रहा। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार को जल्द से जल्द रिक्त पद भरकर शिक्षण व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।
- रिद्धम शर्मा, छात्र नेता, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज 

इनका कहना है
आरपीएससी के माध्यम से दिसम्बर में शिक्षक भर्ती परीक्षा है। जिसमें सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के बाद सरकार द्वारा कॉलेजों में ज्वाइनिंग दी जाएगी। जिससे रिक्त पद भर सकेंगे। रही बात, महत्वपूर्ण विषयों की क्लास नहीं लगने की तो जिन महाविद्यालयों में यह समस्या है, वहां के प्राचार्य के आग्रह पर रे-सेंटर से 6-6 दिन के लिए शिक्षण कार्य के लिए शिक्षक लगा दिए जाते हैं।  सरकार की ओर से क्वालिटी एजुकेशन देने के प्रयास लगातार जारी है।
- डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा

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