जहरीले सल्फर के साए में जी रहा शहर
काम 60 फिसदी से ज्यादा पूरा हुआ नियमों में अटका, शुरू करने के होगें प्रयास - उर्जा मंत्री
कोटा। शहर के आसमान में लगातार मंडराता धुआं और चिमनियों से उड़ती राख शहरवासियों की सेहत के लिए लगातार बड़ा खतरा बनी हुई है। कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट में धुएं से उठने वाली जहरीली गैसों को फिल्टर करने के लिए बनाया जा रहा फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) प्लांट एक बार फिर प्रशासनिक व नियामक अड़चनों में उलझ गया है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर द्वारा हाल ही में दी गई जानकारी के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह प्रोजेक्ट अनिश्चितता के भंवर में चला गया है। जिससे शहर के लोगों की सेहत पर लंबे समय तक गंभीर असर पड़ने की पूरी आशंका है।
10 से 19 लाख मीट्रिक टन कोयले का धुआं
कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट की सभी 7 यूनिट्स को जब पूरी क्षमता (1240 मेगावाट) पर चलाया जाता है, तो रोजाना लगभग 19,000 मीट्रिक टन कोयले की भारी-भरकम खपत होती है। जबकि कम से कम भी माने तो यह 10 लाख मिट्रिक टन तक तो जलता ही है। विशाल पैमाने पर कोयला जलने के कारण लगातार जहरीली गैसें और धुआं शहर के वातावरण में घुल रहा है।
आधा शहर प्रभावित रात भर प्रार्थना
नान्ता, कुन्हाडी,बून्दी रोड, किशोरपुरा,दादाबाडी, आर के पुरम् शिवपुरा, सहित आधे से ज्यादा शहरी आबादी इससे प्रभावित है। स्थानीय निवासी हर्ष गोत्तम ने बताया कि रात के समय भगवान से प्रार्थना करते है कि हवा का रूख हमारी तरफ न हो। वही किशोरपुरा निवासी निरंजना का कहना हैकि सुबह घरों की छतों पर काला पाउडर जमा हो जाता है। ऐसे में यदि हवा को सुधारने के लिए किये जा रहे काम अटकते है तो हमारा तो जीना मुश्किल हो जाएगा।
धुएं से जहरीली गैस होगी अलग
सबसे चिंताजनक बात यह है कि चिमनी से निकलने वाले धुएं में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड (रड2) नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन हवा में मौजूद यह अदृश्य सल्फर ही मानव शरीर और फेफड़ों के लिए सबसे घातक साबित होता है। ऋॠऊ प्लांट का मुख्य काम इसी जहरीले सल्फर को अवशोषित (अब्जॉर्ब) कर हवा को शुद्ध बनाना था, लेकिन प्लांट तैयार न होने से यह खतरनाक जहर सीधा लोगों की सांसों में उतर रहा है।
60% काम पूरा, फिर भी लगी ब्रेक
उर्जा मंत्री ने बताया कि प्लांट का लगभग 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। लेकिन इसके बाद काम को बीच में ही रोक दिया गया है। साक्षात्कार के दौरान ऊर्जा मंत्री ने स्वीकार किया कि केंद्रीय दिशा-निर्देशों में आए बदलावों के कारण प्रोजेक्ट के काम को रोकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, राज्य सरकार ने राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (फएफउ) के समक्ष अर्जी दाखिल कर तर्क दिया है कि प्लांट में बड़ा बजट और निवेश पहले ही लग चुका है, इसलिए पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे पूरा करने की अनुमति दी जाए।
मंजूरी बिना काम संभव नहीं 2027 की डेड लाइन पर संशय
ऊर्जा मंत्री के अनुसार, जब तक नियामक आयोग से हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक प्लांट का काम दोबारा शुरू नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, प्लांट लगना जरूरी है ताकि पर्यावरण की हानि कम हो सके और निवेश की रिकवरी हो, लेकिन फिलहाल मंजूरी मिलने का इंतजार है।
हरी झंडी मिलने का इंतजार
जब तक नियामक आयोग से हरी झंडी मिलने के बाद काम शुरू करवाया जाएगा। प्लांट लगना अत्यंत आवश्यक है ताकि पर्यावरण की हानि कम हो और निवेश की रिकवरी हो सके, लेकिन वर्तमान में इसकी अनुमति का इंतजार है।
- हीरालाल नागर ,उर्जा मंत्री राजस्थान सरकार

Comment List