सुकेत में गंदे पानी का संकट : टंकियों की सफाई नहीं, बीमारियों का बढ़ा खतरा
मुख्य पानी की टंकी में जमी है काई
2-3 साल से नहीं हुई जलाशयों की सफाई, मटमैले पानी से लोग परेशान।
सुकेत। नगरपालिका क्षेत्र सुकेत में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था बदहाल होती नजर आ रही है। जलदाय विभाग को ओवरहेड टंकियों और स्वच्छ जलाशयों की नियमित सफाई नहीं होने से लोगों को दूषित और बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में इससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जानकारी अनुसार विभागीय नियमों में हर छह माह में टंकियों की सफाई अनिवार्य है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई टंकियों की पिछले दो से तीन वर्षों से सफाई तक नहीं हुई। सुकेत कस्बे की मुख्य पानी की टंकी में काई जम चुकी है और पूर्व में मृत पक्षी मिलने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि नलों से आने वाला पानी मटमैला और दुर्गधयुक्त है।
सीएचसी में बढ़ रहे मरीज
सुकेत सीएचसी प्रभारी डॉ. जिंदल के अनुसार दूषित पानी के कारण डायरिया और पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। पिछले एक दिन में नियमित रूप से उल्टी-दस्त के 7 से 8 मरीज अस्पताल पहुंचे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी है। नगरवासियों ने कलेक्टर से टंकियों की सफाई की जांच कराने नियमित सफाई का बोर्ड लगाने और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
नगरवासियों का आरोप है कि जलदाय विभाग केवल कागजों में सफाई और रखरखाव के दावे कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द टंकियों की सफाई और जल गुणवत्ता की जांच नहीं करवाई गई तो आंदोलन किया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मामले में हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की गई है। वहीं बढ़ती गर्मों के बीच दूषित पानी की समस्या ने आमजन की चिंता और परेशानी दोनों बढ़ा दी हैं।
नगरवासियों में भारी आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चे आए दिन उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं, इसलिए मजबूरी में वहीं गंदा पानी उपयोग करना पड़ रहा है।
फिल्टर प्लांट बंद, क्लोरीन का अधिक उपयोग
नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर फिल्टर प्लांट बंद पड़े हैं। ऐसे में पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन की अधिक मात्रा डाली जा रही है, जिससे पानी का स्वाद और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
इसकी जानकारी जेईएन द्वारा दी जाएगी। यह कार्य मेरे स्तर का नहीं है।
- बच्चू सिंह मीणा, एईएन, जलदाय विभाग।

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