शराबी यमदूत लील रहे जिंदगी, हादसों का जिम्मेदार कौन

इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ

शराबी यमदूत लील रहे जिंदगी, हादसों का जिम्मेदार कौन

शराब पीकर वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ आज तक कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

कोटा। सड़कों पर शराब पीकर बेकाबू दौड़ते वाहन चालक लोगों के लए यमदूत बन रहे हैं। इन शराबी यमदूतों पर कोई लगाम नहीं लगा पा रहा। अपनों का दर्द उसे ही महसूस होता है जिसे अपना कोई छोड़कर चला जाता है। लेकिन आज तक हादसों में लोगों की मौत के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा। सबसे बड़ी बात है कि शराब पीकर वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ आज तक कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई। अगर कोई हादसा होता है तो 185 एमवीएक्ट में कार्रवाई कर बाद मेंं छोड़ दिया जाता है।

केस  नंबर एक

जयपुर के हरमाडा क्षेत्र में तीन नंवबर 2025 को एक बेकाबू डंपर ने कई वाहनों को रौंंद दिया था। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी। डंपर तेज रफ्तार से लहराता आ रहा था और सड़क किनारे खड़े वाहनों को टक्कर मारते हुए चला जा रहा था। डंपर ने दस वाहनों को टक्कर मारी थी। डंपर एक किलो मीटर तक रास्ते में वाहनों को रौंदता चला आ रहा था। चालक शराब के नशे में था। इस दौरान डंपर की स्पीड करीब 100 किलो मीटर प्रति घंटा थी।

केस नंबर दो

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जयपुर के ही बजाज नगर थाना क्षेत्र में 29 जनवरी 2026 को एक बेकाबू कार ने दोपहर के समय में कहर बरपाया और बेकाबू कार पांच वाहनों को टक्कर मारते हुए एक मॉल की दीवार से टकरा गई थी। हादसे में दो लोगों के चोट आई थी। कार चालक पूरी तरह से नशे में था। बाद में बजाज नगर पुलिस ने हिरासत में लिया था।

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केस नंबर तीन

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बूंदी जिले के डाबी थाना क्षेत्र में बुधवार रात को एक टे्लर की टक्कर से बाइक सवार तीन बच्चों की मौत हो गई थी। मदन बंजारा निवासी पराणा अपने बच्चों के साथ बाइक से डाबी उपचार के लिए जा रहे थे। रास्ते में देर रात करीब साढ़े नौ बजे तेज रफ्तार ट्रेलर ने दूधी कुडी कट के पास बाइक को जोर दार टक्कर मार दी। हादसे में सुमन उम्र 6, अंकित सात साल व भतीजे करण की मौत हो गई थी।

केस नंबर चार

नयापुरा थाना क्षेत्र में दस फरवरी को एक तेज रफ्तार ट्रक चलाक ने ट्रक को लहराते हुए कई वाहन चालकों को टक्कर मार दी। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। ट्रक चालक को पुलिस और आमजन ने पीछा कर जेडीबी कॉलेज के सामने रोक लिया और उसे नीचे उतारा गया तो वह जमीन पर ही लेट गया। पुलिस ने उसे तुरंत एमबीएस लेकर गई और जांच की गई तो वह शराब के नशे में था और कुछ बोल नहीं पा रहा था।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

ऐसे मामलों में यातायात पुलिस निरंतर कार्रवाई की जा रही है तथा एमवीएक्ट 185 में मुकदमा दर्ज किया गया है। शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान भी समय समय पर जागरुकता के लिए चलाया जाता है। कई बार ऐसे चालकों के लाइसेंस रदद करने के लिए आरटीओ को लिखा जाता है। हादसे ना हों इस पर विशेष फोकस रहता है।

- तेजस्वनी गौतम, कोटा सिटी एसपी

यातायात नियमों की जानकारी परिवहन विभाग और पुलिस के साथ संयुक्त रूप से दी जाती है। साथ ही ऐसे मामलों में यातायात पुलिस द्वारा ऐसे वाहन चालकों के लाइसेंस रद़्द करने के लिए अगर सिफारिश आती है तो निश्चित रूप से रद्द किए जाते हैं। हाइवे और स्टेट हाइवे पर निरंतर गश्त रहती है।

- मनीष शर्मा, आरटीओ कोटा

कोटा शहर के मुख्य स्थानों व पाइंटों पर पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, जिससे शहर में बिना इजाजत के कोई भारी वाहन प्रवेश ना कर सके। शराब पीकर वाहन चालाने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 185 एमवीएक्ट में कार्रवाई की जाती है। अब मुकदमा भी दर्ज किया जाता है और बार समझाइश के बाद भी नहीं मानने पर लाइसेंस रदद करवाने के लिए आरटीओे भेज दिया जाता है।

- देवेश भारद्वाज, टीआई कोटा सिटी

शराब पीकर वाहन चलाना केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन ,तकनीकी निगरानी ,जन-जागरूकता , सामाजिक भागीदारी, समुदाय स्तर पर पुलिसझ्रनागरिक सहयोग मिलना चाहिए तथा स्कूल और कॉलेज में यातायात नियमों के प्रति जागरुक करने के साथ साथ जिम्मेदार ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस से देने पहले सड़क सूरक्षा के नियम और शराब पीकर वाहन चालने पर कानूूनी कार्रवाई को समझाना चाहिए।

- नीलम मुकेश विजयवर्गीय, अध्यक्ष केट वीमेन विंग कोटा

शराब के नशे या अन्य नशीले पदार्थ का सेवन कर वाहन चलाना एमवी एक्ट की 185 के तहत एक दण्डनीय अपराध है। ऐसा करने पर प्रथम बार अपराध करने पर 6 माह के करावास या 10,000 के जुमार्ने या दोनों से दण्डित किया जा सकता है , अपराध की पुनरावृति पर 15000 के जुमार्ने या 2 वर्ष के कारावास दण्डनीय है , किन्तु ये एक जमानती अपराध है अपराध की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में लाया जाना चाहिए ।

- लोकेश नंदवाना, एडवोकेट

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