फोलोअप: प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास ने मांगा जवाब, महकमे में मचा हड़कम्प
बोटनीकल गार्डन में फायर लाइन के नाम पर 38 लाख का घोटाले का मामला
कोटा। कोटा वन मंडल द्वारा बोटनीकल गार्डन में फायर लाइन के नाम पर किया गया 38 लाख रुपए घोटाले का मामला खुलने के बाद वन महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है। गबन की आंच जयपुर वन मुख्यालय तक पहुंच गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) शिखा मेहरा ने बुधवार को कोटा वन उच्चाधिकारी से जवाब तलब किया है। उन्होंने इस संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। इस पर सीसीएफ व डिविजन कार्यालय में हलचल तेज रही। इधर, वन विशेषज्ञों का कहना है कि 40 हैक्टेयर का बोटनीकल गार्डन, जो सम्पूर्ण पठारी क्षेत्र है और निरीक्षण पथ से कवर्ड होने के बावजूद फायर लाइन के नाम पर लाखों रुपयों का घोटाला संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। मामले की तुरंत उच्च स्तरीय अधिकारियों की टीम गठित कर निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
नोटिफाइड होती है हर फायर लाइन, मनमर्जी से नहीं बन सकती
वन विशेषज्ञों का कहना है कि हर फायर लाइन नोटिफाइड होती है, कहीं भी मनमर्जी से नई फायर लाइन नहीं बनाई जा सकती। यदि, बनानी भी होती है तो उसकी डिजाइन बनाकर मुख्यालय को भेजनी होती है, जहां वह नोटिफाइड होती है। क्योंकि, हर नोटिफाइड फायर लाइन के संधारण के लिए हर बजट आता है और वह 2 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से जारी होता है। असल में फायर लाइन घने जंगलों में, जहां ऊंचे-ऊंचे पेड़ हो और भीषण आग लगने की हिस्ट्री रही हो, वहीं बनाई जाती है। चूंकि, बोटनीकल गार्डन का एरिया पठारी है और यहां घना जंगल भी नहीं है। ऐसे में यहां फायर लाइन के नाम पर कागजों में दर्शाया गया 38 लाख का खर्च सीधे तौर पर गबन है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इतना बजट तो कभी कोटा डिविजन के सम्पूर्ण वनक्षेत्र में फायर लाइन के लिए नहीं मिला, जो अकेले बोटनीकल गार्डन में खर्च किया गया।
मामले को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-शिखा मेहरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास जयपुर

Comment List