मात्र 30 हजार में लीक पेपर देने का दावा: नीट पेपर के नाम पर छात्रा को जाल में फंसाने का प्रयास, छात्रा की सजगता से खुला मामला, जांच में जुटीं केंद्रीय एजेंसियां
अजमेर में नीट पेपर लीक का फर्जीवाड़ा
अजमेर। नीट के पेपर लीक की अफवाहों के बीच अब छात्र-छात्राओं को डराकर पैसे ऐंठने वाले शातिर ठग सक्रिय हो गए हैं। अजमेर में ऐसे ही एक डिजिटल ठग ने नीट परीक्षा के नाम पर एक छात्रा को जाल में फंसाकर हजारों रुपए हड़पने की कोशिश की। हालांकि, छात्रा की सूझबूझ और छात्रनेताओं की सजगता के चलते ठग की साजिश नाकाम हो गई। मामले की गंभीरता और पेपर लीक जैसे संवेदनशील विषय को देखते हुए अजमेर पुलिस के साथ-साथ राजस्थान पुलिस की स्पेशल विंग एटीएस और एसओजी भी इस मोबाइल नंबर और ठग के सुराग तलाशने में जुट गई हैं। पूरे मामले का खुलासा शनिवार शाम को हुआ, जब डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह ठाकुर, एबीवीपी छात्रनेता मोहित गहलोत और पीयूष शर्मा पीड़ित छात्रा की शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। छात्रनेताओं ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सिटी) हिमांशु जांगिड़ को बताया कि कॉलेज की बीएससी प्रथम वर्ष की एक छात्रा के पास दो दिन पहले एक अज्ञात मोबाइल नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने दावा किया कि उसके पास नीट री-एग्जाम का ओरिजिनल पेपर है। यह पूरी तरह गोपनीय तरीके से लीक हो चुका है। उसने छात्रा से पेपर के बदले मात्र 30 हजार रुपए की डिमांड की।
बाकी लोग लेते हैं 1.5 लाख, हम सिर्फ 30 हजार
शातिर ठग ने छात्रा पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए कहा कि उसके पास समय बहुत कम है, इसलिए जल्दी फैसला करे। उसने झांसा देते हुए कहा, हम छात्र-छात्राओं की मदद के लिए सिर्फ 30 हजार रुपए ले रहे हैं। कुछ लोग तो हमसे यही पेपर लेकर आगे एक से डेढ़ लाख रुपए में बेच रहे हैं, उनके चक्कर में मत आना। अगर भरोसा नहीं है, तो वीडियो कॉल पर पेपर की झलक देख लो। छात्रा ने घबराने के बजाय इसकी जानकारी छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह को दी।
छात्रनेता को वीडियो कॉल पर दिखाई पेपर
मामले की सच्चाई जानने के लिए छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह ठाकुर ने खुद उसी नंबर पर कॉल कर पेपर की मांग की। जब कृष्णा ने पूछा कि 30 हजार वाले पेपर में से मुख्य परीक्षा में कितने सवाल आएंगे, तो ठग ने दावा किया कि पूरा का पूरा पेपर इसी में से आएगा। गारंटी मांगने पर बदमाश ने तुरंत वीडियो कॉल किया और स्क्रीन पर तेजी से पन्ने पलटाकर पेपर की झलक दिखाई, ताकि कोई स्क्रीनशॉट न ले सके। पैसे के लेन-देन के लिए शातिर बदमाश ने पहले फ्लिपकार्ट का रिडीम कोड बनाकर फोन-पे करने को कहा, और जब छात्रनेता ने असमर्थता जताई तो उसने ऑनलाइन स्कैनर भेजकर भुगतान करने का दबाव बनाया।
एटीएस और एसओजी ने संभाली कमान
एएसपी हिमांशु जांगिड़ ने मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए तुरंत कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक उषा यादव को पूरी स्थिति से अवगत कराया। एसपी के निर्देश पर पुलिस की एक विशेष टीम ने पीड़िता से संपर्क कर तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं। मामले के तार पेपर लीक माफिया से जुड़े होने की आशंका के चलते एटीएस और एसओजी को भी अलर्ट मोड पर डाल दिया गया है।

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