असर खबर का : एडीएम ने एसडीएम व तहसीलदार को दिए जांच कर कार्रवाई के निर्देश
नियम विरुद्ध जमीन खरीद-फरोख्त पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
कोटा। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की जवाहर सागर अभयारण्य की अधिसूचित सीमा में प्रतिबंधित क्षेत्र की जमीन की कथित नियम विरुद्ध खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री के मामले में अब जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है।मुकुंदरा डीएफओ की शिकायत पर बूंदी के अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) रामकिशोर मीणा ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए तालेड़ा उपखंड अधिकारी और तहसीलदार को जांच कर नियमानुसार जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी जिला प्रशासन को भेजने के आदेश दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन की सख्ती के बाद अभयारण्य क्षेत्र में हुई भूमि खरीद-फरोख्त व रजिस्ट्री की जांच तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। यदि, जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है।
नवज्योति में खबर छपने के बाद विभाग में हड़कम्प
दैनिक नवज्योति ने टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में नियम विरुद्ध जमीन खरीद-फरोख्त का मामला उठाने के बाद वन विभाग में हड़कम्प मच गया। डीएफओ मूथू एस द्वारा बूंदी जिला कलक्टर को पत्र भेज रजिस्ट्री निरस्त कर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया। एडीएम कार्यालय से जारी पत्र में बताया गया है कि उप वन संरक्षक (वन्यजीव), मुकंदरा राष्ट्रीय उद्यान कोटा ने अपने पत्र में जवाहर सागर अभयारण्य की सीमा में स्थित ग्राम धनेश्वर में नियम विरुद्ध भूमि खरीद-फरोख्त एवं रजिस्ट्रियों का मामला उठाते हुए आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया था। इसी पत्र के आधार पर एडीएम ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को पूरे प्रकरण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
जांच कर भेजनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
एडीएम ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि शिकायत में उल्लेखित सभी बिंदुओं की जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच और कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट जिला प्रशासन को तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
बढ़ सकती हैं अधिकारियों की मुश्किलें
यह मामला ऐसे क्षेत्र से जुड़ा है, जहां वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत भूमि के लेन-देन और रजिस्ट्रियों पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं। ऐसे में प्रशासनिक जांच के दायरे में आने के बाद संबंधित रजिस्ट्रियों, नामांतरण और उनकी स्वीकृति प्रक्रिया की भी गहन पड़ताल होने की संभावना है। यदि जांच में नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।

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