असर खबर का .... एमएसपी पर अधिकतम गेहूं की खरीद होगी सुनिश्चित : बिरला
सोमवार से सभी खरीद केंद्र पूरी क्षमता से होंगे संचालित
बारिश व ओलावृष्टि से प्रभावित उपज की गुणवत्ता को देखते हुए मानकों में छूट के निर्देश।
कोटा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीद में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कोटा सर्किट हाउस में भारतीय खाद्य निगम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, राजफेड, सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने खरीद व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए मानकों में आवश्यक छूट दी जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी किसान को परेशानी न हो और एफसीआई द्वारा किसानों का शत-प्रतिशत गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। बैठक में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, शासन सचिव (सहकारिता) डॉ. समित शर्मा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव अंबरिश कुमार, राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी और जिला कलक्टर पीयूष समारिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि दाने के रिजेक्शन मानकों में छूट के लिए भारत सरकार से बातचीत हो चुकी है और अगले तीन दिनों में इसके आदेश जारी होने की संभावना है, जिससे किसानों की उपज कम से कम अस्वीकृत हो। साथ ही खरीद का आवंटन दोगुना करने और सोमवार से सभी केंद्र पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए।
अवकाश के दिनों में भी खोलें वेयरहाउस और गोदाम
लॉजिस्टिक और भंडारण व्यवस्था पर बिरला ने कहा कि कोटा-बूंदी में बारदाने की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। अगले सात दिनों में अतिरिक्त बारदाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अवकाश के दिनों में भी वेयरहाउस और गोदाम खुले रहें तथा माल के सुचारू परिवहन के लिए रेलवे रैक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। एमएसपी पर खरीद में अंतर और एफसीआई गोदामों में राजफेड द्वारा भेजे गए गेहूं के रिजेक्शन से जुड़े मामलों का भी शीघ्र समाधान करने को कहा। बिरला ने स्लॉट बुकिंग और बायोमेट्रिक से जुड़ी समस्याओं के समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि सोमवार तक सभी किसानों को स्लॉट मिलना सुनिश्चित किया जाए। किसानों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए भामाशाह मंडी में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।
ऊर्जा मंत्री ने गेहूं खरीद के लक्ष्य बढ़ाने के दिए निर्देश
बैठक में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बूंदी जिले में हाल ही में हुई वर्षा के कारण प्रभावित कम गुणवत्ता वाले गेहूं के सैंपल दिखाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से जल्द से जल्द रिलेक्सेशन प्राप्त कर कम गुणवत्ता वाला गेहूं खरीदने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने समर्थन मूल्य पर कोटा संभाग में गेहूं खरीद के तय लक्ष्य को बढ़ाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 6 लाख मीट्रिक टन खरीद के लक्ष्य को बढ़ाकर दुगुना करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाए और इसके अनुसार खरीद की तैयारियां रखी जाएं। बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव अम्बरीश कुमार ने बताया कि सोमवार से कोटा एवं बूंदी जिलों के सभी क्रय केन्द्रों पर खरीद प्रांरभ हो जाएगी। जितने किसानों ने पंजीयन कराया है उनके पास स्लॉट बुकिंग का मैसेज पहुंच जाएगा।
4 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का बारदाना उपलब्ध
उन्होंने बताया कि संभाग में वर्तमान में 4 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए बारदाना उपलब्ध है। बारदाने के लिए रेट कान्ट्रेक्ट किया जा चुका है। तय लक्ष्य की खरीद पूरी होते ही अतिरिक्त गेहूं की खरीद के लिए बारदाने की व्यवस्था कर ली जाएगी। बैठक में शासन सचिव सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने सहकारिता विभाग के कोटा संभाग स्थित क्रय केन्द्रों पर की गई गेहूं खरीद की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। एमडी राजफैड सौरभ स्वामी ने बताया कि कोटा संभाग में राजफैड के क्रय केन्द्रों पर सभी तैयारियां पूरी हैं और सोमवार से सभी केन्द्रों पर खरीद शुरू कर दी जाएगी। तिलम संघ के अधिकारियों ने जानकारी दी कि उनके 35 केन्द्रों पर खरीद की तैयारियां पूरी हैं। बैठक में संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, जिला कलक्टरपीयूष समारिया सहित एफसीआई, राजफैड, तिलम संघ, सहकारिता, रसद विभाग आदि के अधिकारी उपस्थित रहे।
नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला
किसानों को सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने में किसानों को रही परेशानी के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 4 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि जिले में गेहूं खरीद का सीजन इस बार किसानों के लिए राहत के बजाय संकट बनता जा रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल में नमी का स्तर बढ़ गया है, जिसके चलते सरकारी खरीद केंद्रों पर 14 प्रतिशत से अधिक नमी वाले गेहूं को लेने से साफ इनकार किया जा रहा है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं और अंतत: उन्हें बाजार में कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। बारिश के कारण खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल दोनों ही प्रभावित हुई हैं, जिससे अधिकांश किसानों की उपज निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतर पा रही।

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