नवाचार : कचरे से बनाए स्कूली बैग, चप्पलें और मेट, 2 साल में 4 हजार से ज्यादा बच्चों को बांटे

अपसाइक्लिंग से बच्चों को मिली सहूलियत, पर्यावरण को मिला संरक्षण

नवाचार : कचरे से बनाए स्कूली बैग, चप्पलें और मेट, 2 साल में 4 हजार से ज्यादा बच्चों को बांटे

ग्रीनसोल और फ्यूल ड्रीम फाउंडेशन के साथ शिक्षिका बीना की प्रेरक पहल।

कोटा। प्लास्टिक, रबर और पुराने कपड़ों के ढेर को अक्सर हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन कोटा में उसी कचरे ने हजारों बच्चों की जिंदगी बदल दी। वेस्ट सामग्री को अपसाइकिल कर बनाए गए बैग, मेट और चप्पलें जब सरकारी स्कूलों के बच्चों तक पहुंची तो न सिर्फ उनकी मूल जरूरतें पूरी हुईं, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के साथ शिक्षा को संबल देने भी संदेश दिया है।

2 साल में 4 हजार से ज्यादा बच्चों की जरूरतें की पूरी
कोटा में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए अनोखी पहल पिछले दो वर्षों से लगातार प्रभाव दिखा रही है। ग्रीनसोल फाउंडेशन, फ्यूल ड्रीम फाउंडेशन और कोटा की शिक्षिका बीना केदावत ने मिलकर प्लास्टिक, रबर और टेक्सटाइल वेस्ट को अपसाइकिल कर स्कूली बच्चों के लिए उपयोगी सामान तैयार किए। इस नवाचार से कचरे में फैंकी जाने वाली साम्रगी को रिसाइकिल कर फाउंडेशन व शिक्षिका ने सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए स्कूली बैग, बैठने के लिए मेट और चप्पलें तैयार की। अब तक 4 हजार 333 जरूरतमंद विद्यार्थियों को यह विशेष किट वितरित किए हैं। इस अनूठी पहल की शुरूआत कबीर पारख आश्रम में संत प्रभाकर साहेब की प्रेरणा से हुई। उन्होंने फाउंडेशन टीम और शिक्षिका बीना के प्रयासों की खुले दिल से सराहना की।

बच्चों को नंगे पैर स्कूल जाते देख पसीजा दिल
शिक्षिका बीना ने बताया कि इस अभियान की शुरूआत एक संवेदनशील पल से हुई। कई बच्चों को नंगे पैर और बिना बैग के स्कूल जाते देखा तो दिल पसीज गया। एक तरफ बच्चे संसाधनों के अभाव से ग्रस्त थे तो दूसरी ओर शहर में बढ़ते प्लास्टिक और टेक्सटाइल कचरे से पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है। ऐमें में कचरे को उपयुक्त सामग्री में तब्दील करने का ख्याल मन में आया। जब उन्होंने दोनों समस्याओं को जोड़ा तो समाधान वेस्ट को अपसाइकिल कर बच्चों की जरूरतों का सामान तैयार करने के रूप में मिला।

फाउंडेशन ने कचरे से बनाई क्वालिटी प्रोडक्ट
उन्होंने बताया कि ख्याल को साकार करने के लिए ग्रीनसोल फाउंडेशन से सम्पर्क किया। विशेषज्ञों को इस समस्या के बारे में बताया तो पता चला कि फाउंडेशन इस दिशा में काम कर रही है। इस तरह मंजिल आसान होती गई। ग्रीनसोल फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने पुराने जूतों, रबर, कपड़ों तथा प्लास्टिक वेस्ट को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाले बैग, मेट और चप्पलें तैयार की। फाउंडेशन की उन्नत तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण ने इन उत्पादों को टिकाऊ और उपयोगी बनाया। जिसे शहर के हजारों बच्चों तक पहुंचाया।

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खुशी से चहक उठे बच्चों के चेहरे
बीना कहती हैं, ग्रीनसोल फाउंडेशन के बिना यह काम संभव नहीं था। उनकी तकनीक और समर्पण ने इस अभियान को मजबूत आधार मिला। यह पहल न सिर्फ बच्चों की मूलभूत जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि उन्हें साफ-सुथरे, टिकाऊ व सुरक्षित सामान का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रही है। साथ ही समाज को यह संदेश दे रही है कि वेस्ट से भी जरूरत की चीजें बनाकर संसाधन की पूर्ति की जा सकती है। कोटा जिले के सरकारी स्कूलों में जब बच्चों को स्कूली बैग, मेट व चप्पलें वितरित की गई तो उनके चेहरे खुशी से चमक उठे।

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वर्षवार स्कूलों में किट वितरण का आंकड़ा
वर्ष 2024-25 : कुल किट बांटे-2203
लाडपुरा ब्लॉक में — 1431 किट
कोटा सिटी ब्लॉक — 354 किट
सुल्तानपुर — 173 किट
सांगोद — 245 किट

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वर्ष 2025-26 — कुल किट बांटे 2,130
सांगोद ब्लॉक के स्कूलों में — 578 किट
लाडपुरा ब्लॉक में — 977 किट
खैराबाद ब्लॉक में — 214 किट
कोटा शहर ब्लॉक में — 229 किट
इटावा ब्लॉक में — 132 किट
नोट- एक किट में तीन वस्तु होती है, जिसमें बैग, मेट व चरणपादुका शामिल है।

इन जिलों में हो रहा विशेष किट का वितरण
फाउंडेशन की ओर से कोटा, जयपुर, झालावाड़, बालोतरा, ब्यावर, उदयपुर, अजमेर, हनुमानगढ़ जिले के स्कूलों में यह विशेष किट जरूरतमंद विद्यार्थियों को वितरित किए जा रहे हैं। शिक्षिका केदावत कहतीं हैं, बढ़ते टेक्स्टाइल वेस्टेज और शूज वेस्टेज को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में चिंता व्यक्त कर चुके हैं। हमारा लक्ष्य कोटा में जल्द ही एक संग्रहण केंद्र स्थापित करना है। इस सम्बन्ध में प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वंचित बच्चों को इस पहल का लाभ मिल सके।

 

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