अपना कोटा भी बैठा है एनओसी के बारूद पर

फायर सिस्टम लगाने व एनओसी लेने में बरती जा रही लापरवाही

अपना कोटा भी बैठा है एनओसी के बारूद पर
दिल्ली में होटल के बाद बिहार के निजी अस्पताल आईसीयू में लगी आग से हुई कई मौत।

कोटा। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित बहुमंजिला होटल में लगी आग में एक दिन पहले ही 21 लोगों की मौत हुई थी। उसके अगले दिन गुरुवार को तड़के बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित निजी अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से भी कई लोगों की मौत हो चुकी है। उसी तरह की स्थिति व हालात कभी भी कोटा में हो सकते हैं। इसका कारण बिल्डि़ंगों में फायर सिस्टम लगाने व फायर एनओसी लेने में बरती जा रही लापरवाही है।दिल्ली के होटल अग्निकांड की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि 24 घंटे क भीतर ही बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित निजी अस्पताल की 5 वीं मंजिल पर आईसीयू में आग लग गई। आग तड़के तीन बजे शॉर्ट सर्किट से लगी। जिससे कई लोगों की मौत हो गई व कई लोग घायल हो गए। गर्मी के मौसम में एक के बाद लगातार हो रही इन घटनाओं का कारण लाखों करोड़ों रुपए की बहुमंजिला आवासीय व व्यवसायिक इमारतें बनाने के बाद भी उनमें आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं करना है।

कोटा के सरकारी अस्पतालों में हो चुकी घटनाएं
संभागीय मुख्यालय होने से यहां आधा दर्जन सरकारी अस्पतालों के अलावा बड़ी संख्या में निजी अस्पताल भी है। निजी अस्पतालों की बहुमंजिला इमारते हैं। जिनमें रोजाना हजारों मरीजों व उनके परिजनों का आवागमन रहता है।कोटा में संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल, जे.के. लोन अस्पताल, मेडिकल कॉलेज अस्पताल, न्यून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रामपुरा स्थित जिला अस्पताल के अलावा एमबीएस व जे.के. लोन में नई ओपीडी व आईपीडी अस्पताल भी है।

जानकारी के अनुसार एमबीएस अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग व जे.के. लोन की पुरानी बिल्डिंग में कई बार बिजली के पैनल बॉक्स में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। जे.के. लोन में तो आग लगने से एनआईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई तक बंद हो गई थी।हालांकि आग अधिक बड़ी नहीं होने से समय रहते उस पर काबू पा लिया था। जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन यदि आग अधिक बढ़ जाए तो बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है।

एक होटल में हुई थी घटना
शहर में वैसे बड़ी संख्या में छोटे-बड़े होटल हैं। उनमें से आधों में न तो फायर सिस्टम है और न ही एनओसी है। हालांकि गनीमत है कि यहां अभीतक किसी होटल में आग की बड़ी घटना नहीं हुई है। लेकिन छावनी स्थित एक होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना हो चुकी है। जिसमें वहां रिसेप् शन व हॉल में रखे सोफे व अन्य सामान हीजलकर रह गया था। समय रहते आग पर काबू पाने से बड़ा हादसा टल गया था। लेकिन आग से हुए नुकसान को सही करने के लिए कई दिन तक होटल को बंद रखना पड़ा था।

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कई हॉस्टलों में भी हो चुकी है अग्निदुर्घटना
शहर में सैकड़ों की संख्या में बहुमंजिला इमारतें हैं। जिनमें हॉस्टल, होटल, अस्पतालों के अलावा कोचिंग संस्थान, आवासीय व व्यवसायिक इमारतें, मॉल और शॉपिंग कॉम्पलेक्स शामिल है। शहर के सभी कोचिंग क्षेत्रों में हॉस्टल तो बने हुए हैं लेकिन उनमें से भी अधिकतर में न तो फायर सिस्टम लगे हुए हैं और न ही एनओसी ली हुई है। यही कारण है कि शहर के कई हॉस्टलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।

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बारां रोड नयानोहरा स्थित कोरल पार्क के एक हॉस्टल में आग लगने की घटना हो चुकी है। इस हॉस्टल में निकास द्वार भी संकरा था। साथ ही मुख्य द्वार के पास बिजली के पैनल में आग लगने से धुंआ अधिक होने पर छात्रों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में छात्रों को छत के सहारे दूसरे हॉस्टल से बाहर निकालना पड़ा था।वहीं कुन्हाड़ी स्थित चंचल विहार के एक हॉस्टल में भी आग लग चुकी है। उस समय हॉस्टल में न तो फायर सिस्टम था और न ही एनओसी थी। उस हॉस्टल में बड़ा जनरेटर भी लगा हुआ था। गनीमत रही थी कि यहां कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन अधिकारियों के निर्देश पर निगम के फायर अनुभाग ने उस हॉस्टल को सीज कर दिया था।इसी तरह से नए कोटा शहर के तलवंडी व राजीव गांधी नगर में भी कई हॉस्टलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी है।वहीं गत दिनों झालावाड़ रोड स्थित सिटी मॉल के एक स्टोर में भी भीषण आग लग गई थी। जिससे मॉल में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। साथ ही करीब एक माह से अधिक समय तक मॉल को बंद रखने से दुकानदारों का भी काफी नुकसान हुआ है।

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घटना के बाद नोटिसों से इतिश्री
शहर में आग लगने की जब भी कोई घटना होती है तो उसके बाद नगर निगम का फायर अनुभाग सक्रिय हो जाता है। मॉल में आग लगी तो मॉल व शॉपिंग कॉम्पलेक्स की जांच की गई। हॉस्टल में आग लगने पर हॉस्टलों की जांच, होटल में आग तो होटलों की जांच व अस्पातल में आग तो अस्पतालों की जांच। जांच के बाद जहां भी फायर सिस्टम नहीं लगा होता या एनओसी नहीं होती फायर विभाग की ओरसे संबंधित को नोटिस देकर उसे सिस्टम लगाने व एनओसी लेने के लिए नोटिस देकर पाबंद कर दिया जाता है। उसके बाद फोलोअप नहीं होने से सुधार हुआ या नहीं इसका पता नहीं चलता।

इनका कहना है
कोटा के किसी होटल में आग नहीं लगी है। हालांकि जे.के. लोन व एमबीएस अस्पताल में बिजली के पैनल में आग की घटनाएं हुई थी। अधिकतर अस्पतालों में चाहे सरकारी हैं या प्राइवेट सभी में फायर सिस्टम लगे हुए हैं और एनओसी भी है। हालांकि जे.के. लोन में उपकरण लगे हुए हैं लेकिन सिस्टम नहीं है। सिस्टम लगाने के लिए टेंडर किया हुआ है। फायर अनुभाग की ओर से समय-समय पर सभी जगह की फायर ऑडिट कर कमियां पाए जाने पर नोटिस देकर सुधार भी करवाए जाते हैं। शहर में करीब पंद्रह सौ से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिसों के बाद हॉस्टल व अस्पतालों में सुधार हुआ है। होटलों में भी सिस्टम लगाने व जांच के लिए टीमें गठित कर अभियान चलाया जाएगा। साथ ही होटल एसोसिएशन के साथ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा

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