शहर में बेधड़क दौड़ रहे अवधि पार कॉमर्शियल डीजल वाहन, कार्रवाई की बजाय स्टाफ की कमी का रोना 

जिम्मेदारों की अनदेखी से शहर की आबो-हवा में घुल रहा जहर

शहर में बेधड़क दौड़ रहे अवधि पार कॉमर्शियल डीजल वाहन, कार्रवाई की बजाय स्टाफ की कमी का रोना 

काला धुआं उगल रहे खटारा डीजल वाहनों पर नहीं हो रही कार्रवाई, ट्रैफिक पुलिस सिर्फ हेलमेट-सीट बेल्ट तक सीमित

कोटा। शहर की सड़कों पर बेधड़क अवधि पार डीजल कॉमर्शियल वाहन दौड़ रहे हैं। जबकि, कोटा शहर नॉन अटेंनमेंट की श्रेणी में है। इसके बावजूद खटारा वाहनों का संचालन हो रहा है। इनमें कई वाहन तो ऐसे हैं जो 15 साल से भी ज्यादा पुराने हैं, जिनके पास न तो फिटनेस सर्टिफिकेट है और न ही रजिस्ट्रेशन रिन्यू हुए हैं। जिला परिवहन अधिकारियों की लापरवाही से काला धुआं उगल रहे वाहन शहर की आबोहवा में जहर घोल रहे हैं।  जबकि, सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस भी तैनात रहती है, इसके बावजूद प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही।  

एनजीटी कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना
पर्यावरण को बचाने के लिए पुराने वाहनों को सड़क से हटाना जरूरी है। इसके लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश के चार जिलों को नॉन अटेंनमेंट  की श्रेणी में शामिल करते हुए निर्देश दिए थे कि इन जिलों के शहरी सीमा में 15 साल पुराने कॉमर्शियल डीजल वाहनों को डी-रजिस्टर्ड किया जाए। नॉन अटेंनमेंट जिलों में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा शामिल है। जिसके तहत इन शहरों में 15 साल पुराने डीजल कॉमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं किए जा सकते और न ही सड़कों पर संचालन होगा। लेकिन, कोटा शहर में ऐसे अवधि पार वाहनों का बेधड़क संचालन हो रहा है। 

6.24 लाख में से 22 हजार वाहनों का ही पंजीयन निरस्त 
जिले में 6 लाख 24 हजार से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड हैं। जिसमें से जिला परिवहन विभाग ने अब तक मात्र 22 हजार वाहनों का ही पंजीयन निरस्त किया है। जबकि, 6 लाख 2195 वाहन आॅन रोड है। हैरानी की बात यह है, इनमें से अधिकतर 15 साल पुराने डीजल वाहन है, जिनका संचालन व्यवसायिक रूप से हो रहा है। हैरानी की बात यह है, प्रदूषण फैला रहे खटारा वाहन ट्रैफिक पुलिस के सामने से ही गुजर रहे हैं, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही। वहीं, आरटीओ भी अवधि पार खटारा गाड़ियों को सड़कों से दूर नहीं कर पा रही। 

प्रदूषण से सीओपीडी बीमारी, फेफड़े खराब 
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र ताखर कहते हैं, धुएं में अनगिनत कैमिकल्स होते हैं, जो हवा के साथ शरीर में जाने से दमा, अस्थमा, एलर्जी, खांसी, आंखों में जलन, दिमाग, गुर्दे, फेफड़े के कैंसर, सांस का अटैक सहित दल से संबंधित बीमारियों का खतरा रहता है। हालांकि, दमा बीड़ी पीने से होता है लेकिन यह रोग उन लोगों को भी होता है जो प्रदूषण के सम्पर्क में रहते हैं। पूरी दुनिया में सीओपीडी बीमारी में इंडिया टॉप पर है और भारत में राजस्थान अव्वल है। सीओपीडी बीमारी फेफड़ों को हमेशा के लिए डेमेज कर सकती है। 

Read More थाने के सामने युवती की गला रेतकर हत्या : आरोपी गिरफ्तार, फर्श खून से सना और युवती के बाल नोचे मिले

इन चौराहों पर दौड़ रहे खटारा अनफिट वाहन
शहर के व्यस्तम चौराहों पर बेखौफ अवधि पार कॉमर्शियल खटारा डीजल वाहन दौड़ रहे हैं। सीएडी सर्किल, गुमानपुरा, बोरखेड़ा, नयापुरा, स्टेशन क्षेत्र, सकतपुरा, अनंतपुरा, कोटड़ी चौराहा, सब्जीमंडी, एयरोड्रम सर्किल, घोड़ा चौराहा सहित विभिन्न चौराहों से प्रतिदिन कंडम वाहन दौड़ रहे हैं। जिनके साइलेंसर जमकर काला धुआं उगल रहे हैं। जबकि, इनमें से अधिकतर चौराहों पर ट्रैफिक जवान तैनात रहता है। हैरत की बात यह है, प्रदूषण से सबसे ज्यादा बीमारियों का खतरा भी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ही है। इसके बावजूद इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही। 

Read More जयपुर में फिल्मी स्टाइल में चोरी : राह चलती महिलाओं की सड़क पर गिरी नोटों की गड्डी, बदमाशों ने बाइक स्लिप की और पैसे उठाकर फरार

कार्रवाई की बजाए स्टाफ की कमी का रोना 
अवधि पार खटारा वाहनों के पंजीयन निरस्त कर सड़कों से हटाने के बजाए जिला परिवहन विभाग स्टाफ की कमी होने का रोना रो रहा है। जबकि, कंडम हो चुके खटारा वाहनों का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। जिसमें से कई वाहन तो माल ढोह रहे हैं तो किसी का बाल वाहिनी में उपयोग हो रहा है। गत वर्ष कुन्हाड़ी इलाके में विद्यार्थियों से भरी स्कूल बस पलट गई थी। जिसमें एक छात्र की मौत हो गई थी। मामले की जांच में सामने आया था कि बस का रजिस्ट्रेशन फेल हो चुका था और फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं था। इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही। 

Read More खेल विभाग ने महिला टीम के मामले में खेल परिषद से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट : सीएम की फटकार, उच्चस्तर पर समाधान की कोशिश 

इनका कहना है
कोटा विकास प्राधिकरण के गठन के बाद अधिनियम की धारा 13 के तहत ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड का गठन किए जाने का प्रावधान है। जिसमें बोर्ड में करीब 18 सदस्य होते हैं। नागरिक को यातायात से किसी भी तरह की कोई असुविधा न हो, इसे ध्यान में रखते हुए यह बोर्ड निर्णय लेकर पालना करवाने में समर्थ एवं सक्षम है। शहर में यदि 15 साल पुराने डीजल कॉमर्शियल वाहन का संचालन नियम विरूद्ध हो रहा है तो नागरिकों को मामला बोर्ड के संज्ञान में लाना चाहिए। जिससे कि बोर्ड अपनी बैठक में इस सम्बंध में कारगार उपाय कर सके। 
- विवेक नन्दवाना, वरिष्ठ अधिवक्ता 

अवधिपार वाहनों के मालिकों को प्रदूषण से होने वाले खतरों से सावचेत करने के लिए परिवहन विभाग को समझाइश करने के लिए सेमिनार का आयोजन करना चाहिए। ताकि, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों का संचालन   बंद करने में सहयोग मिल सके। 
- रामगोपाल शर्मा, पर्यावरणविद्

15 साल पुराने डीजल कॉमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने या इससे संबंधित कार्रवाई जिला परिवहन विभाग द्वारा की जाती है। विभाग हमसे  सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। 
- अशोक मीणा, उपाधीक्षक ट्रैफिक पुलिस  

डीटीओ ने नहीं दिया जवाब
मामले को लेकर नवज्योति ने जिला परिवहन अधिकारी को कॉल किया लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। वहीं, खबर में उनका पक्ष रखने के लिए उन्हें वॉइस मैसेज भी किया, जिसका जवाब नहीं मिला। 

Post Comment

Comment List

Latest News

जयपुर में वर्धमान ग्रुप पर इनकम टैक्स की छापेमारी, ऑफिस से करोड़ों का कैश बरामद, कई अहम दस्तावेज जब्त जयपुर में वर्धमान ग्रुप पर इनकम टैक्स की छापेमारी, ऑफिस से करोड़ों का कैश बरामद, कई अहम दस्तावेज जब्त
राजस्थान के प्रभावशाली वर्धमान ग्रुप के रियल एस्टेट और एजुकेशन कारोबार से जुड़े कई ठिकानों पर गुरुवार सुबह इनकम टैक्स...
लोकसभा में ई सिगरेट की गूंज: अनुराग ठाकुर के आरोप पर हंगामा, जानें क्या होता है e-cigarette?
आदिवासी इलाकों में जानबूझकर उपेक्षित व्यवहार कर रही सरकार : गहलोत
केंद्र सरकार का विपक्ष पर हमला, चुनाव सुधार मुद्दों पर लगाया गंभीर आरोप
राजस्थान की बावड़ियों का होगा संरक्षण; शिल्प ग्राम बनेगा लोक कलाओं का नया केंद्र : उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी
राज्य सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर विशेष, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में भर्ती की क्रांति
रुपया धड़ाम! 90.48 प्रति डॉलर के नये निचले स्तर तक टूटा