उम्मेदगंज पक्षी विहार, अभेड़ा तालाब,जोहराबाई का तालाब व बायोलॉजिकल पार्क बना बर्ड्स वॉचिंग का डेस्टिनेशन

कोटा के 4 वैटलेंड पर 200 प्रजातियों के 6 हजार पक्षियों का बसेरा

उम्मेदगंज पक्षी विहार, अभेड़ा तालाब,जोहराबाई का तालाब व बायोलॉजिकल पार्क बना बर्ड्स वॉचिंग का डेस्टिनेशन
हर साल सर्दियों में देश-विदेश से आते हैं 10 हजार से अधिक पक्षी।

कोटा। शहर के 4 वैटलैंड न केवल बर्ड्स वॉचिंग के डेस्टिनेशन बन रहे बल्कि अनुसंधान का केंद्र भी बन रहे हैं। वर्तमान में यहां 200 प्रजातियों के 6 हजार से ज्यादा पक्षियों का बसेरा बसा है। दुनियाभर से हर साल हजारों की तादाद में परिंदे प्रवास पर आ रहे हैं। जिनमें से कई पक्षी तो ऐसे हैं, जो पिछले पांच सालों में पहली बार नजर आए हैं। वन्यजीव विभाग कोटा की ओर से शहरी सीमा के वैटलैंड्स को पक्षियों के अनुकूल हैबीटाट के रूप में विकसित किए गए हैं। जिनमें अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, अभेड़ा तालाब, जोहरा बाई का तालाब और उम्मेदगंज पक्षी विहार शामिल हैं। इन वैटलैंड पर गत फरवरी माह में हुई गणना में विभिन्न प्रजातियों के 10 हजार से अधिक पक्षी काउंट किए गए थे। जबकि, यह संख्या मात्र उम्मेदगंज पक्षी विहार सहित तीन वैटलैंड की है। जबकि, शहरी क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक वैटलैंड हैं। जहां बड़ी संख्या में पक्षियों का प्रवास रहता है। 

अनुसंधान का केंद्र बन रहे वैटलैंड 
वन्यजीव विभाग कोटा के अधीन उम्मेदगंज पक्षी विहार परिंदों की पहली पसंद बना हुआ है। यहां वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की ओर से गत वर्ष से अब तक कई डवलपमेंट कार्य करवाए गए। अवैध फिशिंग के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई व संदिग्ध घुसपैठ पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाए जाने पेड़ों की अवैध कटाई रुकी। इससे पक्षियों का हैबीटाट  न केवल सुरक्षित हुआ बल्कि भोजन की भी पर्याप्त उपलब्धता भी हो गई। अवैध गतिविधियां थमने से परिंदों का कुनबा आबाद हुआ। वर्तमान में यहां पेड़ों पर करीब 80 प्रजातियों के 3 हजार पक्षियों की कॉलोनी बसी है। 

यूरोप से लेकर एशिया तक से आते हैं हजारों परिंदे 
वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि बर्ड्स रिसर्च की दृष्टि से शहर के वैटलैंड अनुसंधान के केंद्र बन चुके हैं। गत 30 व 31 जनवरी को मिड विंटर वाटर फोल पापुलेशन ऐस्टीमेशन-2025 के तहत पक्षियों की गणना करवाई गई थी। जिसमें जोराबाई का तालाब, अभेड़ा  व सालकिया तालाब, बायोलॉजिकल पार्क व उम्मेदगंज पक्षी विहार को मिलाकर करीब 8000 से ज्यादा पक्षी नजर आए थे। इनमें यूरोप से लेकर एशिया तक के पक्षी शामिल हैं। हर साल दुनियाभर से इन वैटलैंड पर हजारों पक्षी आते हैं। कोटा विवि सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बर्ड्स रिसर्चर आते हैं। 

पक्षियों की भूमिका पर बढ़ रहा शोध 
डीएफओ भटनागर कहते हैं, उम्मेदगंज पक्षी विहार, अभेड़ा तालाब, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, सालकिया व जोहराबाई का तालाब, किशोर सागर, गैपरानाथ, गरड़िया महादेव सहित शहर के विभिन्न वैटलैंड बर्ड वॉचिंग का डेस्टिनेशन बन चुके हैं। यहां की फिजा विभिन्न प्रजातियों के देसी-विदेशी पक्षियों की  चहचहाट से गुलजार रहती है। कोटा विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों  व कई शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थी और स्कॉलर्स ईको सिस्टम में पक्षियों की भूमिका, उनके व्यवहार, हैबीटाट, विशेषताएं, सिमटते वनों व वैटलेंड से पक्षियों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर पर शोध कर रहे हैं। 

Read More अब भैंसरोडगढ़ सेंचुरी में तैयार होगी टाइगर की फूड चेन

यह पक्षी आते हैं नजर
उम्मेदगंज पक्षी विहार सहित अन्य वैटलैंड पर कोमन पोचार्ड, क्रेस्टेड पोचर्ड, टफ्टेड पोचार्ड, लिटिल गीब, लिटिल रिंग फ्लॉवर, रफ, कॉमन टील, ब्लू थ्रोट,  विस्किर्ड टर्न, रिवर टर्न, कॉमन कूट, गेडवेल, गागीर्नी, इंडियन कर्सर,कॉटन पिग्मी गीज, बुटेड ईगल,ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, टावनी ईगल, मार्स हैरियर, इंडियन वाइट आई, ब्लू फ्लाई कैचर, हनी बजार्ड, ग्रे हेडेड कैनरीफ्लाई कैचर,ओस्प्रे, मार्स हैरियर, इंडियन वाइट आई सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की आबादी बसी हुई है। जिन्हें देखने बड़ी संख्या में बड्स वॉचर्स यहां आते हैं। 

Read More एनएच-52 पर गड्ढे भरने का काम शुरू, क्षतिग्रस्त हिस्सों में डाली जा रही सामग्री, वाहन चालकों को मिलेगी राहत

चंबल की कराइयों में बसी गिद्दों की कॉलोनी 
नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, शहर के तलाबों पर हर साल विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों मील का सफर तय कर कोटा आते हैं। सर्दी में भोजन, रहवास के लिए तथा गर्मी में वापस माइग्रेशन में चली जाते है। वहीं, गैपरनाथ व गराड़िया महादेव वन क्षेत्र में चंबल की कराइयों के बीच गिद्दों की साउथ ईस्ट एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी बसी है। मोटे अनुमान के तौर पर चंबल में करीब 200 इंडियन वल्चर है।  

Read More महिलाएं आजमा रहीं दांव, ताे कहीं पुरूष चला रहे शमशीर

इन देशों से आते हैं पक्षी
बर्ड्स रिसर्चर हर्षित शर्मा ने बताया कि कोटा के विभिन्न इलाकों में स्थित वैटलैंड पर इन दिनों देसी विदेशी पक्षियों का कलरव गूंज रहा है। आलनिया, उम्मेदगंज, अभेड़ा, उदपुरिया, बरधा डेम, गिरधरपुरा, बोराबांस का तालाब, सोखिया तालाब, किशोर सागर तालाब, उम्मेदगंज, अभेड़ा सहित कई इलाके परिंदों की चहचहाट से गुलजार हैं।  यह पक्षी यूरोप, सेंट्रल एशिया, साइबेरिया, हिमालय, उत्तरी अमेरिका, चीन, रूस, कजाकिस्तान सहित यूरोपियन व एशियाई देशों से आते हैं। शोधार्थियों के लिए शहर के वैटलेंड ज्ञान का खजाना हैं।  

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

न्यूयॉर्क में भारत और वाइशेग्राद समूह की पहली विदेश मंत्री बैठक; व्यापार, सुरक्षा और तकनीक समेत सहयोग बढ़ाने पर सहमति न्यूयॉर्क में भारत और वाइशेग्राद समूह की पहली विदेश मंत्री बैठक; व्यापार, सुरक्षा और तकनीक समेत सहयोग बढ़ाने पर सहमति
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत और मध्य यूरोपीय वाइशेग्राद समूह (V4 - स्लोवाकिया, पोलैंड, चेक गणराज्य, हंगरी) के विदेश...
पोकलेन मशीन गहरी खाई में गिरी : ऑपरेटर की मौत, जानें पूरा मामला
जिस आंचल ने दिया था छांव का सुकून, उसी ने उजाड़ दी सांझ: जयपुर में पोते ने की बुजुर्ग दादी की निर्मम हत्या
34 दिन बाद राजस्थान के 309 नगरीय निकायों से हटी आचार संहिता
उत्तर प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 34 आईएएस अधिकारियों के तबादले, नौ जिलों के जिलाधिकारी बदले गए
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क रवाना, युद्ध खत्म करने और वैश्विक विश्वास बहाली की उम्मीद जताई
जयपुर में 24 से 27 सितंबर तक ENT की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, AI-रोबोटिक सर्जरी पर होगा फोकस