अमेरिका-इजरायल व ईरान युद्ध : 15 सौ करोड़ का निर्यात अटका, हाड़ौती की अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित
कुछ समय पहले सप्लाई हो चुका माल भी रास्ते में ही अटका
प्रभावित होगा कोटा का नियार्त: पेट्रोल-डीजल की किल्लत, वस्तुओं की कीमतें बढ़ेगी ।
कोटा । पहले अमेरिका द्वारा भारत पर पचास फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा से निर्यात उद्योग प्रभावित हुआ था। उससे अभी पूरी तरह से उबरा भी नहीं था कि अब अमेरिका-इजरायल व इरान के बीच युद्ध से कोटा समेत हाड़ौती का निर्यात और अधिक प्रभावित हुआ है। करीब 15 सौ करोड़ से अधिक का निर्यात अटक गया है। वहीं आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की किल्लत होने व अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ?े की भी संभावना है। अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच पिछले कई दिन से युद्ध चल रहा है। जिससे उन देशों में तो लोग परेशान हो ही रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर भारत पर भी पड़ रहा है। भारत के अन्य प्रदेशों के साथ ही कोटा से भी बड़ी मात्रा में सामान अमेरिका और इजरायल व ईरान को निर्यात होता है। लेकिन युद्ध के कारण वहां हालात इतने अधिक बिगड़े हुए हैं कि वहां कोई भी सामान नहीं पहुंचाया जा सकता है।
मसालों व कैमिकल का अटका निर्यात
कोटा व हाड़ौती संभाग से अमेरिका व अन्य देशों को सबसे अधिक चावल के अलावा मसाले जिनमें धनिया व जीरा और गेंहू का निर्यात किया जाता है। साथ ही कैमिकल और सेंड स्टोन का भी निर्यात होता है। लेकिन युद्ध के कारण नया माल तो वहां निर्यात नहीं हो पा रहा है। साथ ही जो माल कुछ समय पहले सप्लाई हो चुका है वह भी रास्ते में ही अटका हुआ है। जिससे या तो उस माल को पहुंचने में समय अधिक लगेगा। अन्य लम्बे मार्ग से उस सामान को पहुंचाने पर उसका खर्चा अधिक हो जाएगा। या फिर संभावना है कि वह भेजा हुआ माल वापस कोटा व अन्य जगहों पर आ सकता है। जिससे पहले से ही बिगड़ी कोटा की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार पड़ सकती है।
भारत की जीडीपी एक फीसदी प्रभावित
दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल ने बताया कि अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच युद्ध होने से कोटा व हाड़ौती से निर्यात होने वाले मसाले, सेंड स्टोन व कोटा स्टोन, कैमिकल का निर्यात सबसे अधिक प्रभावित होगा। करीब 15 सौ करोड़ का निर्यात इस युद्ध के कारण अटक गया है। उन्होंने बताया कि साथ ही जो माल कुछ समय पहले ही निर्यात हुआ है वह रास्ते में अटका हुआ है। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल का आयात कम होने से यहां उसकी किल्लत होगी। जिससे सभी वस्तुओं के भाव बढ?े की संभावना है। उन्होंने बताया कि पहले अमेरिका द्वारा पचास फीसदी टैरिफ की घोषणा से निर्यात प्रभावित हुआ था और अब युद्ध से। इस युद्ध से भारत की जीडीपी 1 फीसदी प्रभावित होगी।मित्तल ने बताया कि वैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृूरदर्शिता के चलते उन्होंने अन्य देशों से जो डील की है उसके कारण बहुत जल्दी किसी भी चीज की किल्लत का सामना भारतीयों को नहीं करना पड़ेगा।
निर्यात घटेगा और महंगाई बढ़ेगी
कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी का कहना है कि युद्ध किसी भी देश में हो उससे अन्य देश भी प्रभावित होते हैं। अमेरिका समेत अन्य देशों को हाड़ौती से निर्यात होने वाले मसाले, आटा, सेंड स्टोन पर तो असर पड़ेगा ही। अमेरिका-इजरायल व ईरान में निर्यात पूरी तरह से बंद हो रहा है। वहां से आयात भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आयात व निर्यात कम होने के साथ ही ईरान से पेट्रोल-डीजल का आयात नहीं होगा। जिससे उनकी किल्लत होने पर अन्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने से महंगाई बढ़ेगी।
युद्ध लम्बे समय तक चला तो होगी परेशानी
कोटा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरूमीत सिंह बेदी ने बताया कि अमेरिका और इजरायल व ईरान में हो रहे युद्ध से सामान्य उद्योग व व्यापार तो प्रभावित हुआ ही है। लेकिन अभी पेट्रोल व डीजल की किल्लत नहीं है। भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है। लेकिन यदि युद्ध लम्बे समय तक चला तो खाड़ी देशों से आने वाले तेल का आयात कम या बंद हो जाएगा। उसके बाद इसकी किल्लत व परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हाड़ौती की अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित
कैट के जिला अध्यक्ष अनिल मूंदड़ा ने बताया कि कोचिंग विद्याथियों की कमी से कोटा की अर्थव्यवस्था पहले से ही काफी प्रभावित हुई है। उसके बाद अमेरिका के टैरिफ की घोषणा और अब अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध से हाड़ौती के व्यापार उद्योग की कमर ही टूट जाएगी। यहां से जो माल अन्य देशों को निर्यात होता है वह या तो पूरी तरह से ठप हो जाएगा या कम हो जाएगा। जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
व्यापार-उद्योग पर असर
कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन ने बताया कि युद्ध भले ही अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच हो रहा हो। लेकिन वहां से होने वाला आयात और वहां होने वाला निर्यात बंद या कम होने से व्यापार उद्योग पर असर पड़ता है। कोटा व हाड़ौती से भी मसाले और खाद्य पदार्थ वहां निर्यात होते हैं। जिससे युद्ध के कारण निर्यात नहीं होने से कोटा व हाड़ौती का व्यापार-उद्योग भी प्रभावित होगा।

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