आम आदमी की थाली से दूर हुई सब्जियां, रुलाने लगा प्याज
आलू 20, हरी मिर्ची 80, टमाटर बिक रहा 40 रुपए प्रति किलो, बढ़ती महंगाई ने लोगों का जीना किया दुश्वार
दैनिक उपयोग की सभी चीजों के भाव आसमान छूने लगे हैं तो सब्जियों की कीमत की मार झेलने वाले लोग अब दालों की रेट सुनकर भी कांप उठते हैं।
सुल्तानपुर। बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर बाजार पर बदनसीबी की लकीर खींच दी है। जिसका प्रभाव आम आदमी की जिंदगी पर देखा जा रहा है। महंगाई के चलते रोजाना काम आने वाली सब्जियां आम लोगों की थाली से दूर होती जा रही हैं। कालाबाजारी के चलते दिनों-दिन बढ़ रही महंगाई ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। जानकारी के अनुसार पिछले दिनों हुई बेमौसम की तेज बारिश के चलते खेतों में पानी भरने से सब्जियां गल गई हैं। आवक कम होने के चलते सब्जियों के भाव भी आसमान को छू रहे हैं। जिससे ग्रामीणों का बजट गड़बड़ा गया है। प्रतिदिन काम में आने वाली हरी मिर्ची 80 रुपए प्रति किलो, धनिया 100 रुपए प्रति किलो तो अदरक डेढ़ सौ रुपए प्रति किलो एवं टमाटर व प्याज 50 रुपए प्रति किलो के ऊपर बिक रहा है। गोभी का भाव भी 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है। हरी सब्जियां पालक व मैथी भी 100 रुपए प्रति किलो के ऊपर चल रही है। सब्जियों का भाव 60 से लेकर 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है। दैनिक उपयोग की सभी चीजों के भाव आसमान छूने लगे हैं तो सब्जियों की कीमत की मार झेलने वाले लोग अब दालों की रेट सुनकर भी कांप उठते हैं। काला बाजारी के चलते आगामी दिनों में हर दाल 100 से 120 तक का आंकड़ा छूने की आशंका है। बाजार मूंग की दाल 120 रुपए प्रति किलो, चने की दाल 90 रुपए प्रति किलो, अरहर की दाल 130 रुपए प्रति किलो, उड़द की दाल 120 रुपए प्रति किलो से भी अधिक भाव में बिक रही है। जबकि कुछ दिनों पूर्व दालों के भाव कम थे। जब मध्यम वर्ग के लोग रसोई के बढ़ते दाम से परेशान हैं तो आम आदमी का तो इस बढ़ रही महंगाई में भगवान ही मालिक है। कुछ दिनों पूर्व भाव सामान्य थे लेकिन कालाबाजारी के चलते अचानक आसमान में पहुंच गई है। जिसने आम वर्ग की कमर तोड़कर रख दी है। बच्चों की फीस, मकान का किराया, दवाइयां, बिजली का बिल ऐसे खर्चे हैं जो किसी के भी रोकने से नहीं रुकते हैं। चाहे कितना भी गरीब आदमी हो लेकिन मजबूरी में उन्हें इनका तो भुगतान करना ही पड़ता है।
आटे की कीमतों में भी हुआ इजाफा
वर्तमान में प्रतिदिन काम में आने वाला आटा व गेहूं के भी भाव आसमान में पहुंच रहे हैं। जहां पूर्व में आटा 25 से 30 किलो मिल जाता था, इन दिनों 35 रुपए प्रति किलो में मिल रहा है। रोजमर्रा के खाने में काम में आने वाले सामानों के भाव आसमान छू रहे हैं तो वही हरी सब्जियों के भाव भी दुगने हो चुके हैं। महंगाई से आम जनता का बहुत बुरा हाल है। कई लोग तो महंगाई के चलते बाजारों में खरीदारी तक करने नहीं आ रहे हैं।
इनका कहना है
महंगाई ने घर के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहले की कहावतें सिद्ध हो रही हंै कि गृहस्थी चलाना भी एक टेढ़ी खीर है, यह सच भी होता जा रहा है। महंगाई के कारण वाकई में गृहस्थी चलाना एक टेढ़ा काम हो गया है। लोगों को अब अपने बजट में कटौती करनी पड़ रही है।
- रीना गौड़, ग्रहणी
रसोई में सब्जियों से किनारा कर चुकी हूं। एक कटोरी दाल में पांच कटोरी पानी डालकर गुजारा करना पड़ रहा है। बढ़ती हुई महंगाई को देख कर जैसे-तैसे गुजारा करना पड़ रहा है।
- लवीना, ग्रहणी
महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन और कष्टकारी होंगे। आलू, प्याज के भाव भी आसमान छू रहे हैं। खाद्य सामग्रियों के बढ़ते हुए दामों से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
- गायत्री शर्मा, ग्रहणी
बारिश में गला बीज, दुबारा करनी पड़ी सब्जियों की बुवाई
सब्जी की खेती करने वाले किसान जगदीश अजमेरा एवं बनवारी लाल सुमन का कहना है कि पूर्व में हरी सब्जी पालक एवं मैथी के बीज की बुवाई करते समय बारिश हो जाने के कारण बीज गल गए थे। जिसके चलते दोबारा सब्जियां लगानी पड़ीं। जिससे क्षेत्र की सब्जियां मंडी में देर से आने के कारण बाहर से आने वाली हरी सब्जियां महंगी पड़ रही हैं। साथ ही प्याज की फसल की आवक भी कम होने के कारण अचानक से प्याज के दामों में तेजी आ गई है।
बाहर से मंगानी पड़ रहीं सब्जियां
सब्जी बेचने वाले जीतू राठौर, कमल सुमन का कहना है कि बाहर से आने वाली सब्जियां महंगी आ रही हैं। जिसके चलते सब्जियों की रेट में अचानक तेजी आ गई है।

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