चंबल में नई जिंदगी की आहट, पालीघाट में 215 नन्हे घड़ियालों ने खोली आंखें

वन विभाग की चौबीस घंटे निगरानी से बढ़ा घड़ियालों का कुनबा

चंबल में नई जिंदगी की आहट, पालीघाट में 215 नन्हे घड़ियालों ने खोली आंखें

भीषण गर्मी और तपते रेतीले तटों के बीच राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य से वन्यजीव प्रेमियों के लिए सुखद खबर सामने आई। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की पालीघाट रेंज अंतर्गत चंबल एवं पार्वती नदी संगम क्षेत्र में दुर्लभतम घड़ियाल प्रजाति के नन्हे बच्चे अंडों से बाहर निकलकर अपनी नई दुनिया में कदम रख रहे।

सवाई माधोपुर। भीषण गर्मी और तपते रेतीले तटों के बीच राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य से वन्यजीव प्रेमियों के लिए सुखद खबर सामने आई है। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की पालीघाट रेंज अंतर्गत चंबल एवं पार्वती नदी संगम क्षेत्र में दुर्लभतम घड़ियाल प्रजाति के नन्हे बच्चे अंडों से बाहर निकलकर अपनी नई दुनिया में कदम रख रहे हैं। पालीघाट क्षेत्र में अब तक करीब 100 घड़ियाल हैचलिंग्स का सुरक्षित जन्म दर्ज किया गया है, जिसे वन विभाग चंबल क्षेत्र में चल रहे संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता है।

वन विभाग ने तैयार किए थे नेस्ट
वन विभाग के अनुसार इस वर्ष मार्च और अप्रैल माह के दौरान घड़ियालों ने चंबल नदी के संवेदनशील रेतीले तटों पर लगभग 22 से 25 नेस्ट तैयार किए थे। इन नेस्ट में करीब 600 से 650 अंडे दिए गए। मई के अंतिम सप्ताह से इन अंडों से बच्चों का बाहर निकलना शुरू हुआ है। अभी तक पालीघाट क्षेत्र के 6 नेस्ट से लगभग 210-215 नवजात घड़ियाल सुरक्षित बाहर आए हैं, जबकि आने वाले दिनों में अन्य नेस्ट से भी बड़ी संख्या में हैचलिंग्स निकलने की संभावना है।

घड़ियाल संरक्षण के लिए चौबीस घंटे निगरानी
वन विभाग ने नेस्ट वाले संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास विशेष फेंसिंग की है ताकि जंगली जानवर अंडों अथवा नवजात बच्चों को नुकसान न पहुंचा सकें। शुरुआती कुछ सप्ताह नवजात घड़ियालों के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं। विभागीय टीम द्वारा नदी तटों पर नियमित गश्त, चौबीस घंटे मॉनिटरिंग एवं संवेदनशील स्थलों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।

सिर्फ घड़ियाल नहीं, पूरी नदी पारिस्थितिकी के प्रहरी
विशेषज्ञों का मानना है कि घड़ियाल संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने का प्रयास नहीं बल्कि पूरी नदी पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घड़ियाल नदी के खाद्य तंत्र का अहम हिस्सा हैं और इनकी उपस्थिति स्वस्थ नदी तंत्र का संकेत मानी जाती है।
चंबल नदी कई 

जानवरों का आवास
चंबल नदी का यह क्षेत्र घड़ियालों के साथ-साथ मगरमच्छ, कछुए, ऊदबिलावए गंगा डॉल्फिन तथा कई दुर्लभ पक्षियों का भी महत्वपूर्ण आवास है। स्वच्छ जलधारा और विस्तृत रेतीले तट यहां घड़ियालों के प्रजनन के लिए आदर्श वातावरण उपलब्ध कराते हैं।  

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