फर्जी ई-मित्र आईडी के नाम पर साइबर ठगी करने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार
क्यूआर कोड और यूपीआई के जरिए राशि वसूली जा रही
सीएसटी और रामनगरिया थाना पुलिस ने फर्जी ई-मित्र रिटेलर आईडी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़। पुलिस ने जगतपुरा स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर पर कार्रवाई में 9 आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही विधि से संघर्षरत एक नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सम्प्रेषण गृह भेजा।
जयपुर। सीएसटी और रामनगरिया थाना पुलिस ने मंगलवार को फर्जी ई-मित्र रिटेलर आईडी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने जगतपुरा स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर पर कार्रवाई में 9 आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही विधि से संघर्षरत एक नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सम्प्रेषण गृह भेजा है। पुलिस ने मौके से 8 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, 6 लैपटॉप चार्जर और अपराध में प्रयुक्त वाहन जब्त किए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में अजय सिंह नगर फोर्ट टोंक हाल किराएदार मुहाना मंडी रोड मानसरोवर, इन्द्रजीत सिंह श्याम रेजिडेंसी प्रताप नगर, शुभम योगी लालसोट दौसा हाल रघुनाथपुरी टोंक रोड सांगानेर, दिलखुश उर्फ सागर गुर्जर मेहंदवास टोंक हाल किराएदार प्रताप नगर का रहने वाला है। इसी तरह गिरफ्तार महिला आरोपी सोनिया द्विवेदी सैनी कॉलोनी सांगानेर, नेहा सिंह बलिया उत्तर प्रदेश हाल किराएदार हीरावत नगर सांगानेर रेलवे स्टेशन के पास, कंचन रीको कांटा सांगानेर, रितू सांगानेर रेलवे स्टेशन के पास और शालू रावत अजमेर हाल रामनगरिया की रहने वाली है।
पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने बताया कि जगतपुरा स्थित एबीएस प्लाजा-7 नम्बर बस स्टैंड के पास प्रथम तल पर संचालित इस फर्जी कॉल सेंटर में युवक-युवतियां लैपटॉप और मोबाइल फोन के माध्यम से लोगों को कॉल कर ई-मित्र रिटेलर आईडी दिलवाने का झांसा दे रहे थे। इसके बदले क्यूआर कोड और यूपीआई के जरिए राशि वसूली जा रही थी। सूचना मिलने पर सोमवार को संयुक्त टीम ने दबिश देकर कॉल सेंटर का खुलासा किया।
ऐसे करते थे ठगी
गिरोह कथित रूप से सीएससी ई मित्र केन्द्र डॉट कॉम, लॉगइन नामक पोर्टल, साझा ईमेल आईडीए मोबाइल नंबरों की डेटा शीट और व्हाट्सएप पर बनाए गए पेमेन्ट ग्रुप के जरिए लोगों को फंसाता था। कॉल कर इच्छुक व्यक्तियों को ई-मित्र रिटेलर आईडी उपलब्ध करवाने का भरोसा दिया जाता और फिर क्यूआर कोड भेजकर भुगतान लिया जाता था। भुगतान के बाद दी गई कथित आईडी से वास्तविक ई-मित्र सेवा उपलब्ध नहीं होती थी।
मुख्य संचालक फरार
पूछताछ में एक मुख्य संचालक की भूमिका सामने आई है, जिसने कथित रूप से कार्यालय सेटअप, लैपटॉप, मोबाइल, सिम, पोर्टल, डेटा और भुगतान व्यवस्था उपलब्ध करवाई थी। वह कार्रवाई के दौरान फरार मिला। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और डिजिटल फुटप्रिंट, बैंकिंग ट्रेल व मोबाइल कनेक्टिविटी की जांच की जा रही है।
4 पुरुष रिमांड पर और 5 महिलाएं न्यायिक अभिरक्षा में
गिरफ्तार 4 पुरुष आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 29 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। वहीं 5 महिला आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। पुलिस के अनुसार महिलाओं को पहले सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपराजिता महिला सुरक्षा केंद्र भेजा गया था, बाद में पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

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