चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त :  राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को सीसीटीवी, सेंसर और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के आदेश

अवैध परिवहन रोकने के कदमों का ब्यौरा मांगा

चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त :  राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को सीसीटीवी, सेंसर और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, एमपी और यूपी सरकारों को चंबल अभयारण्य में अवैध खनन रोकने के लिए 6 माह में हाई-टेक निगरानी सिस्टम लगाने के आदेश दिए। सीसीटीवी, सेंसर और जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य होगी। फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहन जब्त होंगे। मुरैना में फॉरेस्ट गार्ड पर हमले पर कोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध खनन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सरकारों को तत्काल प्रभाव से ठोस और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने तीनों राज्यों को प्रभावित इलाकों में सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल सेंसर और मानिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि ये काम युद्ध स्तर पर किया जाए और छह महीने के अंदर सभी निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से चालू होनी चाहिए। इसके अलावा जिन वाहनों का इस्तेमाल अवैध खनन में किया जा रहा है उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने फर्जी नंबर प्लेट या बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को जब्त कर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई केवल वाहन चालक पर ही नहीं बल्कि वाहन मालिकों और ठेकेदारों पर भी होनी चाहिए।

फॉरेस्ट गार्ड पर हमले पर कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुरैना में रेत माफिया द्वारा एक फॉरेस्ट गार्ड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली चढ़ाने की घटना पर भी कड़ा एतराज जताया था। अदालत ने मध्यप्रदेश प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि जब राज्य मशीनरी अपने अधिकारियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में विफल है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

अवैध परिवहन रोकने के कदमों का ब्यौरा मांगा

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कोर्ट ने अवैध खनन का परिवहन रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी भी मांगी। 17 अप्रैल को चंबल अभ्यारण्य में अवैध खनन पर सख्ती रवैया अपनाते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने और जीपीएस ट्रैकिंग करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने साफ किया था कि अगर अवैध खनन का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत कार्रवाई करें और मौके पर टीम भेजें और कठोर कदम उठाएं।

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