सरकार के बाल विवाह रोकथाम पर सवालिया निशान : 14 की उम्र में शादी, खिलौने बेचते गोवा से रेस्क्यू हुई उदयपुर की 15 वर्षीय गर्भवती किशोरी
माता-पिता से लेकर पति-सास तक जांच के घेरे में
राजस्थान में बाल विवाह और नाबालिगों के शोषण के खिलाफ चल रही तमाम सरकारी मुहिमों के बावजूद एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। गोवा में नववर्ष के दौरान रेस्क्यू की गई 15 वर्षीय गर्भवती नाबालिग के तार उदयपुर जिले के फतहनगर क्षेत्र से जुड़े हैं। मामला केवल एक जिले का नहीं, बल्कि पूरे राज्य में बाल अधिकारों की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है।
उदयपुर। राजस्थान में बाल विवाह और नाबालिगों के शोषण के खिलाफ चल रही तमाम सरकारी मुहिमों के बावजूद एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। गोवा में नववर्ष के दौरान रेस्क्यू की गई 15 वर्षीय गर्भवती नाबालिग के तार उदयपुर जिले के फतहनगर क्षेत्र से जुड़े हैं। मामला केवल एक जिले का नहीं, बल्कि पूरे राज्य में बाल अधिकारों की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है। गोवा पुलिस और बाल कल्याण समिति की संयुक्त कार्रवाई में रेस्क्यू की गई यह नाबालिग गुब्बारे और खिलौने बेचते मिली थी। काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि वह गर्भवती है और बाल विवाह की शिकार है। इसके बाद गोवा बाल कल्याण समिति ने जीरो नंबर एफआईआर दर्ज कर प्रकरण राजस्थान भेजा।
गोवा की पणजी बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सुषमा चांडेकर की ओर से दर्ज जीरो नंबर एफआईआर के आधार पर फतहनगर थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने पोक्सो एक्ट, बाल विवाह निषेध अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) के तहत जांच शुरू कर दी है। बच्ची को फिलहाल उसके माता-पिता को सुपुर्द किया गया है, जबकि बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
14 की उम्र में शादी, 15 में मां बनने की मजबूरी
पुलिस के अनुसार बच्ची ने बताया कि वह उदयपुर के फतहनगर क्षेत्र की रहने वाली है। सिर्फ 14 वर्ष की उम्र में उसके माता-पिता ने उसकी शादी उदयपुर के ही एक युवक से करा दी। इसके बाद वह ससुराल में रहने लगी और गर्भवती हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते वह दिसंबर में पति और सास के साथ गोवा पहुंची, जहां नववर्ष के दौरान सड़कों और समुद्र तटों पर गुब्बारे व खिलौने बेचकर जीवनयापन कर रही थी।
माता-पिता और ससुराल पक्ष पर भी कार्रवाई संभव
कानून के जानकारों के मुताबिक यह मामला केवल पति तक सीमित नहीं है। बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता, साथ ही पति और सास भी कानूनी रूप से आरोपी बनाए जा सकते हैं। कानून स्पष्ट है कि नाबालिग की सहमति का कोई महत्व नहीं होता और 18 वर्ष से कम उम्र की बच्ची का गर्भवती होना स्वत: ही दुष्कर्म की श्रेणी में आता है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब राजस्थान सरकार बाल विवाह रोकने और बेटी बचाओ जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। इसके बावजूद एक नाबालिग बच्ची का राज्य से बाहर जाकर गर्भवती अवस्था में श्रम करने को मजबूर होना प्रशासनिक निगरानी और सामाजिक जागरूकता दोनों की पोल खोलता है।

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