सैन्य संघर्ष के 100 दिन बीते: दुनिया भर में जंग दोबारा भड़कने की आशंका से खौफ, दोनों के दरम्यान चल रहा युद्धविराम

60 दिनों के सीजफायर पर मंथन

सैन्य संघर्ष के 100 दिन बीते: दुनिया भर में जंग दोबारा भड़कने की आशंका से खौफ, दोनों के दरम्यान चल रहा युद्धविराम
अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष 100 दिनों पर पहुंच गया है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के शुरुआती 100 घंटों में अमेरिका ने ₹31,000 करोड़ गंवाए। होर्मुज स्ट्रेट संकट से दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और महंगाई में भारी उछाल आया है। भारी सैन्य जनहानि के बाद अब 60 दिनों के नाजुक संघर्ष विराम पर बातचीत जारी है।

वाॅशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष 100 दिनों तक पहुंच गया है। यह टकराव ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के नाम से जाना गया, जिसकी शुरूआत 28 फरवरी को हुई। इस युद्ध में अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान को निशाना बनाया था, जिसके पहले ही दिन तेहरान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई। अमेरिकी थिंक टैंक सीएसआईएस की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरूआती 100 घंटों में ही अमेरिका का लगभग 31,000 करोड़ रुपए का भारी खर्च हुआ। 

होर्मुज का संकट

होर्मुज स्ट्रेट तेल की वैश्विक आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग है, जहां दोनों देशों की सेनाओं के आमने-सामने आने से ग्लोबल आॅयल क्राइसिस और मंहगाई बढ़ गई है। इस क्षेत्र में तनाव के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम और आम इस्तेमाल के रोजमर्रा उत्पादों की कीमतों में उछाल देखा गया है। भारत सहित पूरी दुनिया में अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध का बहुत नकारात्मक असर हुआ है। भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है।

सीजफायर और शांति वार्ता

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इन 100 दिनों की गहन लड़ाई और बड़े पैमाने पर हुए नुकसान के बाद, मध्यस्थ देश अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के संघर्ष विराम विस्तार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। लेकिन इन शांति प्रयासों को मिलने वाली सफलता के बारे में कोई भी आश्वस्त नहीं है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब अनप्रीडेक्टेबल मान लिए गए हैं और कोई भी उनकी बातों या वादों पर यकीन नहीं करता। वैसे दोनों पक्षों के बीच एक नाजुक सा युद्धविराम मौजूद है, लेकिन पूरी दुनिया जंग दोबारा शुरू होने के प्रति आशंकित भी है।

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अमेरिका के 15 सैनिक मरे, 543 जख्मी

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युद्ध में अमेरिका के 15 सैनिक मारे गए और 543 सैनिक घायल हुए। जबकि इजरायल के 29 जवान और एक कांट्रैक्टर मारे गए। उसके 28 नागरिक भी ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों में घायल हुए। संयुक्त अरब अमीरात के दो सैनिक और 11 नागरिक ईरानी हमलों में घायल हुए। जबकि कुवैत के चार सैनिक और सात नागरिक ईरानी हमलों में मारे गए। साथ ही उसके 78 सैनिक और 104 नागरिक घायल हुए। दूसरी ओर ईरानी दावे के अनुसार उसके 3,468 लोग युद्ध में मारे गए और 26500 घायल हुए। जबकि हजबुल्ला के एक हजार से अधिक लोग मारे गए। 

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