सिखों की नजरबंदी, अल्पसंख्यकों के खिलाफ पाकिस्तान का चीन के उइगरों वाला सीक्रेट ऑपरेशन

पाकिस्तान में सिख एक्टिविस्टों पर बढ़ी निगरानी

सिखों की नजरबंदी, अल्पसंख्यकों के खिलाफ पाकिस्तान का चीन के उइगरों वाला सीक्रेट ऑपरेशन

इस्लामाबाद में सिख नेताओं के उत्पीड़न के आरोप सामने आए हैं। पाकिस्तानी एजेंसियां सिख एक्टिविस्टों को निगरानी, अलगाव और आर्थिक दबाव में रख रही हैं, मामला गोपाल सिंह चावला से जुड़ा है।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सिख नेताओं के साथ उत्पीड़न का मामला सामने आया है। सिख नेताओं को अलग किया जा रहा है और उनकी निगरानी हो रही है। खासतौर से सिख एक्टिविस्ट पाकिस्तानी एजेंसियों के निशाने पर हैं। इन दावों के सामने आने की वजह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सिख नेता गोपाल सिंह चावला हैं। खालिस्तान समर्थक गोपाल चावला ना सिर्फ पाकिस्तानी एजेंसियों बल्कि आतंकी हाफिज सऊद के भी चहेते रहे हैं। अब उनको घर में ही नजरबंद रखा गया है।

टॉप इंटेलिजेंस सूत्रों के हवाले से की गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सिख नेताओं के साथ पाकिस्तान का बर्ताव ऐसा ही है, जैसा चीन उइगर मुस्लिमों के साथ करता है। इसमें लंबे समय तक कैद, निगरानी और आर्थिक रूप से कमजोर करने पर जोर दे रहा है। इस्लामाबाद अल्पसंख्यकों को खतरे के रूप में मैनेज करने की नीति अपना रहा है। इसके तहत सिख एक्टिविस्टों को बिना कानूनी प्रक्रिया के अलग-थलग किया जा रहा है।

गोपाल की चर्चा

पाकिस्तान ने सिख नेता नेता गोपाल सिंह चावला को बीते तीन साल कथित तौर पर नजरबंद रखा है। चावला पहले पंजाबी सिख संगत के चेयरमैन थे, अब ये संगत बंद हो गई है। चावला पर औपचारिक रूप से कोई आरोप नहीं लगाया गया है। दावा किया गया है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत से खतरे का हवाला देते हुए चावला को नजरबंद रखा है। इंटेलिजेंस सूत्रों का तर्क है कि यह पाकिस्तानी अफसर चावला को भारत से खतरे बहाना बना रहे हैं। सिख नेता की गिरफ्तारी से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध के चलते ये तर्क दिए जा रहे हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी करक ने सीधी गिरफ्तारी के बजाय सिख नेताओं की आवाजाही पर रोक लगाने, रोजगार छीनने और परिवार से संपर्क तोड़ने जैसे तरीके अपनाए हैं।

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चावला घर में कैद

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गोपाल चावला के करीबियों आरोप है कि उन्हें अपने परिवार से नियमित रूप से मिलने नहीं दिया जा रहा है। उनका कार शोरूम बंद हो गया। उन्हें अपनी होम्योपैथी मेडिकल प्रैक्टिस भी बंद करने के लिए मजबूर किया गया है। फिलहाल उनका परिवार कथित तौर पर 55,000 रुपए के वजीफे पर गुजारा कर रहा है। चावला के पिछले संबंधों से मामला और भी पेचीदा हो जाता है। वह हाफिज सईद के साथ मिलकर काम कर चुके हैं। दोनों की तस्वीरें सार्वजनिक रूप से सामने आई थीं। चावला को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का भी करीबी माने जाता था। करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ वह दिखे थे।

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आईएसआई के लिए बने बोझ

शीर्ष खुफिया सूत्रों के अनुसार, करक अब पाकिस्तान में सक्रिय खालिस्तानी समूहों से दूरी बना रहा है। खासकर लाहौर में खालिस्तानी नेता हरमीत सिंह उर्फ हैप्पी पासिया पुंजवार की हत्या के बाद ये एहतियात बढ़ी है। पाकिस्तान में खालिस्तानी तत्वों को अब बोझ की तरह देखा जा रहा है। सूत्रों का तर्क है कि पाकिस्तान की यह रणनीति चीन की उइगर मुस्लिमों के खिलाफ नीति की तरह है। इसमें बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां नहीं की जाती। इसके बजाय अलगाव, आर्थिक नियंत्रण और परिवार से अलग करके लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का काम किया जाता है।

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