ईंधन संकट: श्रीलंका में आपूर्ति बाधाओं के बीच अनिवार्य क्यूआर कोड व्यवस्था लागू, साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित
श्रीलंका में ईंधन संकट: क्यूआर कोड और साप्ताहिक कोटा प्रणाली लागू
पश्चिम एशिया युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने पर श्रीलंका ने अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली फिर से शुरू की है। जमाखोरी रोकने के लिए कारों के लिए 15 लीटर और बाइक के लिए 5 लीटर जैसे साप्ताहिक कोटे तय किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य मौजूदा स्टॉक का कुशल प्रबंधन कर आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।
कोलंबो। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति मार्गों में आए व्यवधानों को देखते हुए श्रीलंका सरकार ने रविवार से देश भर में वाहनों के लिए अनिवार्य क्यूआर कोड प्रणाली के माध्यम से ईंधन वितरण शुरू कर दिया है। ऊर्जा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कदम देश के ईंधन भंडार का कुशल प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उठाया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था आज सुबह से प्रभावी हो गई है। अब किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना पंजीकृत क्यूआर कोड के वाहनों को ईंधन जारी नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस प्रणाली के साथ-साथ वाहनों के लिए साप्ताहिक ईंधन कोटा भी निर्धारित किया है। इसके तहत बसों को 60 लीटर, कारों को 15 लीटर, मोटरसाइकिल को 5 लीटर, वैन को 40 लीटर और भारी वाहनों (लॉरी) को 200 लीटर ईंधन आवंटित किया गया है। इसके अलावा थ्री-व्हीलर्स के लिए 15 लीटर और विशेष प्रयोजन वाहनों के लिए 40 लीटर की सीमा तय की गई है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और घरेलू मांग में अचानक आई तेजी के कारण मौजूदा स्टॉक का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना आवश्यक हो गया था। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ईंधन की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी ने भी मांग में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्यूआर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी पर लगाम लगाना और आम जनता के दैनिक कार्यों को बिना किसी व्यवधान के सुनिश्चित करना है।
उल्लेखनीय है कि श्रीलंका ने इससे पहले वर्ष 2022 के भीषण आर्थिक संकट के दौरान भी इसी प्रकार की क्यूआर प्रणाली का सफल कार्यान्वयन किया था। आवश्यक सेवाओं और उत्पादन गतिविधियों में लगे वाहनों के लिए अलग से वितरण व्यवस्था लागू की जाएगी।

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