यूक्रेन युद्ध का असर, भारतीय वर्कर्स की शरण में पहुंचा रूस, 2026 में 72,000 को देगा जॉब
रूस में भारतीय कामगारों के लिए बड़े अवसर
रूस ने श्रम संकट दूर करने के लिए भारत के लिए 71,817 कामगारों का आधिकारिक कोटा निर्धारित किया है। राष्ट्रपति पुतिन की हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान हुए समझौतों के तहत यह भर्ती होगी। हालांकि, रूसी सेना में जबरन भर्ती के आरोपों के बीच सरकार ने सुरक्षा और कानूनी प्रवासियों पर ज़ोर दिया है।
मॉस्को। रूस ने भारत के कामगारों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। बीते चार वर्ष से यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझे रूस ने लेबर रिसोर्स की कमी को पूरा करने के लिए भारत से 72,000 प्रवासियों को लाने की योजना बनाई है। इससे भारतीयों के लिए रूस में काम करने के अवसर बड़े पैमाने पर पैदा होंगे। रूस और भारत के बीच कामगारों को लेकर हालिया समय में कई समझौते हुए हैं। इस महीने की शुरूआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली दौरे के दौरान भी इस मुद्दे पर दोनों पक्षों में सहमति बनी थी। हालांकि रूस में काम के लिए जाने वाले युवाओं को जबरन सेना में भेजने के आरोप भी लगे हैं।
कामगारों का कोटा 235,000 रखा
मोस्कोव्स्की कोम्सोमोलेट्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के लिए रूस ने आधिकारिक विदेशी कामगारों का कोटा 235,000 रखा है। इसमें भारत को आधिकारिक तौर पर 71,817 का कोटा दिया गया है। हालांकि नई दिल्ली और बॉम्बे के कुछ सूत्रों का कहना है कि यह संख्या पूरे भारत से आने वाले आवेदनों के सामने बहुत कम है। कुछ रिपोर्ट में रूस से 10 लाख तक भारतीयों को वीजा देने का भी दावा किया गया, मंत्रालय ने अवास्तविक बताते हुए खारिज किया है।
पुतिन के प्रतिनिधि ने दिए आंकड़े
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष प्रतिनिधि बोरिस टिटोव ने कहा है कि कम से कम 42,000 भारतीय राजधानी मॉस्को और देश के दूसरे बड़े शहरों में आएंगे। टिटोव ने कहा कि वास्तव में कितने लोग होंगे, यह अभी भी पता नहीं है लेकिन उम्मीद है कि यह आंकड़ा 40,000 से कम नहीं होगा। पुतिन के विशेष प्रतिनिधि ने जारी हुए परमिट के आंकड़े दिए हैं। उन्होंने बताया कि 2022 में 8,000 भारतीयों को परमिट मिले। साल 2023 में ये संख्या 14,000 और 2024 में बढ़कर 36,000 हो गई। यह दिखाता है कि रूस आने वाले भारतीय कामगारों की संख्या बीते तीन सालों में तेजी से बढ़ी है। बोरिस टिटोव ने भारतीयों की रूस में काम करने की बढ़ती दिलचस्पी का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि भारत लेबर रिसोर्स की कमी को पूरा करने में रूस की मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिभाशाली हैं। दुबई जैसे शहर को मुख्य रूप से भारतीय मजदूरों और डेवलपर्स ने बनाया है। भारतीयों की चिंता कुछ ऐसी रिपोर्ट बढ़ा रही हैं, जिनमें कहा गया है कि रूसी अधिकारी भारत के साथ लेबर एग्रीमेंट डील का इस्तेमाल करके भारतीयों को यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में भेज रहे हैं। ऐसे आरोप रूस पर लगाने वाले कई भारतीय हालिया समय में सामने आए हैं।

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