सेनाओं की वापसी शुरू

स्थिति बहाल की जाएगी

सेनाओं की वापसी शुरू

दोनों देशों के उच्च सैन्य अधिकारियों की बातचीत के बाद तनातनी का माहौल खत्म करने पर सहमति बन गई। अब विवादित गोगरा, हाट स्प्रिंग क्षेत्र से दोनों देशों ने अपनी सेनाओं की वापसी शुरू कर दी है।

भारत और चीन के बीच पिछले लगभग 2 साल से चल रहा गतिरोध टूट गया है। दोनों देशों के उच्च सैन्य अधिकारियों की बातचीत के बाद तनातनी का माहौल खत्म करने पर सहमति बन गई। अब विवादित गोगरा, हाट स्प्रिंग क्षेत्र से दोनों देशों ने अपनी सेनाओं की वापसी शुरू कर दी है। वहां निर्मित सभी अस्थायी निर्माण ध्वस्त कर पूर्व स्थिति बहाल की जाएगी। यहां निस्संदेह भारत की बड़ी कूटनीतिक और सैन्य सफलता है। 2 साल पहले गलवान में दोनों देशों के सैनिक आपस में भिड़ गए थे, जिसमें भारत के 20 स और चीन के 40 से 45 सैनिक शहीद हो गए थे। इस हादसे हादसे के बाद पूर्वी लद्दाख इलाके में लगातार तनाव बढ़ता गया। धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए चीनी सैनिकों ने भारत के कई देखरेख ठिकानों पर कब्जा कर लिया था। 

यह सभी भारत को भड़काने की नीति के तहत किया जा रहा था, लेकिन भारत ने संयम रखा। हजारों की संख्या में सेनाएं आमने-सामने थी। हालात तनाव पूर्ण होने के बावजूद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ताएं होती रहीं, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकल पा रहा था। चीन गोगरा हाट स्प्रिंग से हटने को तैयार नहीं था। हालांकि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा का विवाद काफी पुराना है। अभी तक अंतिम रूप से यह तय नहीं हो पाया है कि भारत का कितने भू-भाग पर अधिकार होगा और चीन की सीमा कहां तक होगी। पुराने समझौतों के आधार पर करीब 60 बिन्दु है, जहां दोनों देशों को गश्ती का अधिकार मिला, लेकिन चीन के सैनिक इन बिन्दुओं से भी आगे बढ़कर भारत की सीमाओं में घुसपैठ करते रहे। भारतीय सेना की चेतावनी के बाद वे लौट भी जाते थे। गलवान के हादसे के बाद चीन के सैनिक वापस नहीं गए और आखिर तनाव बढ़ता गया। अब तनाव दूर हो गया है और क्षेत्र में शांति और स्थिरता आएगी। भारत सीमा विवाद का यथोचित समाधान कर रहा है, लेकिन चीन की इसमें विशेष रूचि नहीं है। दोनों देशों की सेनाओं की वापसी का एक पहलू यह भी है कि अगले हफ्ते शंघाई कॉओपरेशन ऑर्गेनाइजेशन की शिखर बैठक है, जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन केराष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत होने की सूचना है। इससे पहले पूर्वी लद्दाख में कुछ सकारात्मक सहमति बनाना जरूरी था। 

 

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