बाघिन के मुकाबले बाघ कमजोर, झलक रहा बुढ़ापा

सुस्त रहता टाइगर, चिकन नहीं आ रहा रास

बाघिन के मुकाबले बाघ कमजोर, झलक रहा बुढ़ापा

वह अपनी डाइट का 75 प्रतिशत भोजन ले रही है और आत्मविश्वास से लबरेज नजर आती है। इसके मुकाबले बाघ की चाल-ढाल और चलने की गति बहुत कम है। वहीं, नाहर न तो गुर्राता है और न ही दहाड़ लगाता है।

कोटा। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से अभेड़ा लाए गए बाघ-बाघिन को रविवार को 18 दिन बीत चुके हैं। तीन दिन बाद दोनों को दर्शकों के लिए 4 हजार स्क्वायर मीटर के एनक्लोजर में रिलीज किया जाएगा। हालांकि टाइग्रेस के मुकाबले टाइगर शारीरिक रूप से कमजोर है। 9 मार्च को उसे ताकत और दर्द निवारक के दो इंजेक्शन दिए गए थे। इसके बाद बाघ में थोड़ा सुधार हुआ है लेकिन, उसके चलने-फिरने में बुढ़ावा झलक रहा है। अधिकतर समय नाइट शेल्टर व कराल में सुस्त बैठा रहता है। जबकि, बाघिन लगातार मूवमेंट करती रहती है। डाइट भी बाघ से अधिक ले रही है। फिलहाल दोनों ही अभी क्वारंटाइन में हैं और वन्यजीव चिकित्सक की निगरानी में है। जल्द ही दोनों को खुले बाड़े में छोड़ दिया जाएगा। वहीं, छुट्टी का दिन होने से अभेड़ा में दिनभर पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। शेरनी को नजदीक से देखकर शहरवासी रोमांचित हो गए। कहानी-किताबों में देखे जाने वाले लॉयन को प्रत्यक्ष रूप से सामने देखकर आंन्नदित हो गए। 

नाहर पर झलक रहा बुढ़ापा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभेड़ा आने के 18 दिन बाद भी बाघ नाहर की एक्टिवनेस में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। वह पहले की तरह ही अधिकतर समय सुस्त ही रहता है। वह कभी कराल में तो कभी नाइट शेल्टर में आंखें बंद कर बैठा रहता है। उसे देखकर ऐसा प्रतित हो रहा है कि वह अभी भी अवसाद से उबर नहीं पाया। जबकि, बाघिन को अभेड़ा रास आ चुका है। वह अपनी डाइट का 75 प्रतिशत भोजन ले रही है और आत्मविश्वास से लबरेज नजर आती है। इसके मुकाबले बाघ की चाल-ढाल और चलने की गति बहुत कम है। वहीं, नाहर न तो गुर्राता है और न ही दहाड़ लगाता है। बाघिन से करीब डेढ़ साल उम्र से छोटा होने के बावजूद सक्रियता कम है। चिकन की अपेक्षा पाड़ा मांस ही खा रहा है। उसके स्वास्थ्य पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है। 

पर्यटकों को रोमांचित कर रही सुहासिनी
अभेड़ा में आने वाले पर्यटक शेरनी सुहासिनी को देख रोमांचित हो रहे हैं। वह अधिकतर समय एनक्लोजर में ही विचरण करती है। दिनभर में करीब 20 से 25 चक्कर 4 हजार स्क्वायर मीटर में फैले एनक्लोजर का लगा रही है। साइटिंग होने से दर्शक उत्साहित नजर आते हैं। बोरखेड़ा निवासी अजय कुश्वाह ने बताया कि रविवार को छुट्टि का दिन होने से परिवार को लेकर अभेड़ा घूमने आए हैं। अब तक लॉयन को कहानी व किताबों में ही देखा था लेकिन आज प्रत्यक्ष रूप से देखकर रोमांचित हो गए। बच्चे एनक्लोजर के बाहर घंटों सुहासिनी को निहारते रहे। 

गुर्राती और दहाड़ लगाती महक 
बाघ की अपेक्षा में बाघिन महक ज्यादा एक्टिव है। वह दिनभर कभी कराल तो कभी नाइट शेल्टर में मूवमेंट करती है। वर्तमान में महक 19 साल और 2 माह की हो चुकी है। वह गुर्राती और दहाड़ भी लगाती है। 10 दिन में उसकी डाइट में इलाफा हुआ है। गत 9 मार्च तक वह अपनी डाइट का 60 प्रतिशत ही भोजन कर रही थी, अब 75 प्रतिशत डाइट ले रही है। महक पूरी तरह +से फिट है। वह खुद को नए माहौल में ढाल चुकी है। पूर्व में भी महक कोटा में रह चुकी है। 

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शावकों की डाइट बढ़ाई 
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर के नाइट शेल्टर में रह रहे दोनों शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनकी डाइट में कुछ बदलाव किया गया है। पूर्व की तरह 4 किलो चिकन दिया जा रहा है। इसके अलावा आधा किलो बकरे का मांस डाइट में जोड़ा गया है। वहीं, पाड़े का लिवर भी दिया जा रहा है। इसके अलावा न्यूट्रिशियन की कमी पूरी करने के लिए दोनों को 20 से 25 ग्राम कैटलेट मिल्क पाउडर दिया जा रहा है। दोनों शावकों का वर्तमान में तीन गुना वजन बढ़ गया है। 

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16 साल का है नाहर  
बाघ नाहर का जन्म 20 अक्टूबर 2006 को भोपाल के जुलॉजिकल पार्क वन विहार में हुआ था।  जब वह 7 साल का था तब उसे जयपुर चिड़ियाघर लाए थे। इसके बाद वर्ष 2016 में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया था। वर्तमान में नाहर की उम्र 16 साल से अधिक है और उसका वजन 200 किलो से ज्यादा है। 2019 में बाघ नाहर की जोड़ी बाघिन महक के साथ बनाई गई थी। काफी समय तक दोनों साथ रहे। दोनों के बीच मेटिंग भी हुई लेकिन महक मां नहीं बन सकी। फिर इसके बाद महक की बहन बाघिन रंभा के साथ इसकी जोड़ी बनाई गई थी।

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दोनों को एनक्लोजर में छोड़ रहे
बाघ और बाघिन को कभी-कभी 5 से 10 मिनट के लिए एनक्लोजर में छोड़ा जाता है। ताकि, उन्हें घूमने के लिए ज्यादा जगह मिल सके और नए वातावरण में खुद को ढाल सके। जानकारों का मानना है कि नाइट शेल्टर और कराल में जगह कम होने से उन्हें विचरण के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। ऐसे में थोड़ा समय खुले बाड़े में छोड़ा जाता है। 

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