इंडिया हैबिटेट सेंटर में 'मैनिक्विन' एग्जिबिशन को देखने बड़ी संख्या में पहुंचे कला के कद्रदान

आईजीएनसीए के सेक्रेटरी डॉ. सच्चिदानंद जोशी सुमित मिश्रा की कला को सराहा

 इंडिया हैबिटेट सेंटर में 'मैनिक्विन' एग्जिबिशन को देखने बड़ी संख्या में पहुंचे कला के कद्रदान

राजधानी के इंडिया हैबिटेट सेंटर में लगी प्रदर्शनी 'मैनिक्विन' को देखने के लिए दूसरे दिन काफी संख्या में लोग पहुंचे।

जयपुर। राजधानी के इंडिया हैबिटेट सेंटर में लगी प्रदर्शनी 'मैनिक्विन' को देखने के लिए दूसरे दिन काफी संख्या में लोग पहुंचे। आईएचसी की विजुअल आर्ट गैलरी में आज शुरू हुई इस प्रदर्शनी में मुंबई के फिल्ममेकर और प्रोडक्शन डिजाइनर सुमित मिश्रा की 25 सोलो मैनिक्विन पेटिंग प्रदर्शित की गई हैं। अपनी बात कहने के आर्टिस्ट के इस अनोखे तरीके को दर्शक काफी उत्सुकता से देख रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सेक्रेटरी डॉ. सच्चिदानंद जोशी भी आज इस प्रदर्शनी में पहुंचे और यहां प्रदर्शित पेंटिंग्स को सराहा। अभिनेता आदित्य ओम गैलरी में प्रदर्शित मैनिक्विन आर्ट को निहारते नजर आए। कला के कद्रदानों से मुखातिब होने और अपनी कला और दृष्टि पर चर्चा करने के लिए सुमित मिश्रा खुद भी लगातार प्रदर्शनी में मौजूद हैं। 'मैनिक्विन' प्रदर्शनी पर बात करते हुए सुमित मिश्रा कहते हैं उन्होंने इसके जरये मौजूदा समय के विभिन्न विषयों और अर्थों को समेटने का प्रयास किया है। प्रदर्शनी में एक पेंटिंग विशेष तौर पर सबका ध्यान आकर्षित कर रही है, जिसमें ढेर सारे नर मुंड दिखाई दे रहे हैं। सुमित मिश्रा उसकी व्याख्या करते हुए उसे 'शांत सैलाब' की संज्ञा देते हैं। यानी इंसानों का एक ऐसा समंदर जिसमें अंधे, गूंगे, बहरे और मासूम लोगों की भीड़ है, जो सिर्फ अनुसरण करना जानती है। लेकिन यही भीड़ जब नींद से जागती है और अपनी खामोशी तोड़ती है तो एक नया सवेरा होता है। गौरतलब है कि मुंबई की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए दो दशक से काम कर रहे बीएचयू के पूर्व छात्र सुमित मिश्रा कई फिल्मों और टीवी सीरियल्स के लिए प्रोडक्शन डिजाइनिंग कर चुके हैं। उनकी शॉर्ट फिल्म "अमृता" को 20 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं।

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