महिलाओं के आरक्षण पर बीजद का केंद्र पर निशाना : सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे पर लोगों को कर रही गुमराह, 'राजनीतिक ड्रामा' करने का लगाया आरोप,

सुलता देव ने इस मुद्दे पर 'न्याय में देरी' का आरोप लगाया

महिलाओं के आरक्षण पर बीजद का केंद्र पर निशाना : सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे पर लोगों को कर रही गुमराह, 'राजनीतिक ड्रामा' करने का लगाया आरोप,

ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) ने महिला आरक्षण विधेयक को केंद्र का 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया है। सांसद सुलता देव ने आरोप लगाया कि सरकार सशक्तिकरण के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन का इंतजार किए बिना 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, ताकि राज्यों का प्रतिनिधित्व कम न हो।

भुवनेश्वर। ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर 'राजनीतिक ड्रामा' करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रही है। बीजद की राज्यसभा सांसद सुलता देव और वरिष्ठ महासचिव लेखाश्री सामंतसिंहार ने केंद्र के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'झूठा प्रचार' करार दिया, वहीं महिला आरक्षण की आड़ में उस पर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर केंद्र सरकार सचमुच महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे 543 सांसदों के बीच तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए।

सुलता देव ने बताया कि महिला आरक्षण बिल को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' के रूप में पेश किया गया था और वह संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है तथा उसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके बावजूद उसे 2024 के आम चुनावों के दौरान लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र अब देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करते हुए देरी के लिए विपक्ष को दोषी ठहराने की कोशिश कर रही है, जिसे उन्होंने जनता का ध्यान भटकाने के लिए एक 'राजनीतिक ड्रामा' बताया।

सुलता देव के अनुसार यह अधिनियम 2023 में सभी राजनीतिक दलों के समर्थन से पारित किया गया था, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि इसे अगले आम चुनावों में तुरंत लागू किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केंद्र सरकार का कहना था कि जनगणना पूरी होने और उसके बाद निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। सुलता देव ने हालांकि दावा किया कि पांच राज्यों में चुनावों के दौरान संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया था ताकि आरक्षण प्रस्ताव के साथ-साथ 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन को आगे बढ़ाया जा सके। 

उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के कदम से ओडिशा और कई दक्षिणी तथा पूर्वी राज्यों जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिसके चलते विपक्षी दलों ने अपना समर्थन वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव विफल होने के बाद भाजपा ने विपक्षी दलों को महिला-विरोधी के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। सुलता देव ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर 'न्याय में देरी' करने के बावजूद खुद को महिला-समर्थक के रूप में पेश करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया और कहा कि मतदाता ऐसे दावों के पीछे की सच्चाई को पहले ही समझ चुके हैं।

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