हिमाचल राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना, 'ऑपरेशन लोटस 2.0' की आशंका को लेकर कांग्रेस चिंतित
हिमाचल राज्यसभा चुनाव: 'ऑपरेशन लोटस 2.0' की सुगबुगाहट, कांग्रेस सतर्क
हिमाचल में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा 'ऑपरेशन लोटस 2.0' के जरिए उलटफेर की तैयारी में है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सीट के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने तीव्र राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना दिख रही है और सभी संकेत एक कठिन मुकाबले तथा एक महिला उम्मीदवार के उच्च सदन में भेजने की प्रबल संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं। राज्य में 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में इस चुनाव पर बारीकी से नजर रखी जा रही है क्योंकि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विधानसभा में बहुमत होने के बावजूद एक सीट गंवा दी थी जिसका व्यापक कारण क्रॉस-वोटिंग एवं आंतरिक असहमति को माना गया।
जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी अपनी पिछली हार को दोहराने से बचने के लिए इस बार सावधान नजर आ रही है वहीं भारतीय जनता पार्टी अपनी पिछली सफलता से उत्साहित होकर राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा 'ऑपरेशन लोटस 2.0' के रूप में वर्णित रणनीति की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भगवा पार्टी चुपचाप अपना समर्थन जुटा रही है और एक दर्जन से अधिक विधायकों के संपर्क में हो सकती है जो संभावित रूप से कांग्रेस के व्हिप की अवहेलना कर सकते हैं।
भगवा पार्टी के पास प्रचुर संसाधन मौजूद है और उसकी कांग्रेस में भी थोड़ी बहुत घुसपैठ है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता ऐसे हैंं जो तटस्थ रुख अपनाए हुए हैं। भाजपा में कथित रूप से एक अपेक्षाकृत नए चेहरे, संभंवत: एक महिला को मैदान में उतारने पर विचार-विमर्श चल रहा है ताकि छवि एवं आंतरिक दोनों ही दृष्टिकोणों से इसका लाभ उठाया जा सके।
हिमाचल प्रदेश की मूल निवासी और चंडीगढ़ के एक निजी विश्वविद्यालय में उप उपकुलपति हिमानी सूद का नाम पार्टी हलकों में संभावित उम्मीदवार के रूप में चर्चा में है हालांकि, अभी तक कोई औपचारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है। इस बीच, कांग्रेस एकजुट होने के लिए संघर्ष कर रही है। एक विकल्प के रूप में प्रतिभा सिंह पर विचार किया जा रहा है जो पूर्व सांसद और छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह की पत्नी हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि उनकी उम्मीदवारी एक समझौतावादी रणनीति हो सकती है जिससे पार्टी अपने बिखरे हुए गुटों को एकजुट करके कम से कम एक राज्यसभा सीट बरकरार रख सकेगी। एक और चर्चित नाम डॉ. आस्था अग्निहोत्री का है जो हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और उन्हें एक गैर-विवादास्पद शैक्षणिक चेहरे के रूप में पेश किया जा सकता है।
हाल ही में, प्रतिभा सिंह को एचपीसीसी अध्यक्ष पद से हटाए जाने से तथाकथित होली लॉज खेमे में तनाव और बढ़ गया है। कांग्रेस नेता व्यक्तिगत रूप से मानते हैं कि वीरभद्र सिंह की विरासत को लंबे समय तक नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है।
कांग्रेस के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, अगर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी बिना आम सहमति के किसी उम्मीदवार को थोपने का फैसला करती है तो क्रॉस वोटिंग का खतरा तेजी से बढ़ सकता है, जिससे सुक्खू सरकार खुद खतरे में पड़ सकती है। राज्यसभा चुनाव नजदीक आने के साथ-साथ संभवत: आगामी बजट सत्र के साथ हिमाचल प्रदेश एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।
हिमाचल प्रदेश में क्या कांग्रेस अनुशासन लागू करने एवं दलबदल को रोकने में सफल होगी या भाजपा 'ऑपरेशन लोटस 2.0' के माध्यम से एक बार फिर से अप्रत्याशित उलटफेर करेगी, यह न केवल राज्यसभा की एक सीट का भाग्य तय करेगा बल्कि राज्य के नाजुक राजनीतिक संतुलन की स्थिरता को भी निर्धारित करेगा।

Comment List