यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव, दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को सौंपी यूपी की कमान
कांग्रेस जमीन पर अपना आधार मजबूत करने में जुटी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में बड़ा सियासी दांव चला है। दलित नेता और पूर्व आप मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को कांग्रेस का महासचिव बनाकर यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने ब्राह्मण नेता अविनाश पांडे की जगह ली है। इसे संगठन में रुटीन बदलाव नहीं, बल्कि दलित और वंचित तबकों को साधने की आक्रामक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि भाजपा के सवर्ण वोटरों की तरफ झुकाव के बाद दलित वोट बैंक में जगह खाली हुई है। 1980 के दशक के अंत तक दलित कांग्रेस के कोर वोटर थे, बाद में बसपा ने इस पर कब्जा कर लिया। लेकिन पिछले 7-10 साल में बसपा सत्ता की गंभीर दावेदार नहीं रही।
एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "बसपा का ग्राफ गिरा है। हमें मौका दिख रहा है।" कांग्रेस को भरोसा 2024 लोकसभा नतीजों से मिला है। 2019 में सिर्फ रायबरेली सीट और 6.36% वोट शेयर के मुकाबले 2024 में कांग्रेस ने 17 में से 6 सीटें 9.46% वोट शेयर के साथ जीतीं। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने भाजपा को यूपी में नंबर-2 पर धकेल दिया। भाजपा 2019 की 62 सीटों से घटकर 33 पर आ गई, सपा ने 37 सीटें जीतीं।
विधानसभा में कांग्रेस का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2017 में सपा से गठबंधन में 105 में से 7 सीटें जीतीं। 2022 में अकेले 399 सीटें लड़कर सिर्फ 2 सीटें- रामपुर खास और फरेंदा जीतीं, जो अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "2024 में हमारा प्रदर्शन बेहतर रहा। सपा से गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन संगठन मजबूत करके हम गठबंधन की चर्चा में अपनी स्थिति बेहतर करेंगे। हमारे पास जमीन पर काम करने के लिए 5 महीने हैं।"
राजेंद्र पाल गौतम का कांग्रेस में कद तेजी से बढ़ा है। सितंबर 2022 में कांग्रेस जॉइन की, जून 2025 में एससी कांग्रेस विंग के अध्यक्ष बने और जून 2026 में यूपी जैसे बड़े राज्य के प्रभारी। बसपा से आप होते हुए कांग्रेस में आए गौतम को दलित राजनीति और जमीनी मोबिलाइजेशन का अनुभव है। चार्ज लेने के बाद गौतम ने कहा, "मैं एक हफ्ते में यूपी आऊंगा और पार्टी की रणनीति पर चर्चा करूंगा।" पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, "यह संकेत है कि कुछ हफ्तों में प्रदेश संगठन में और बदलाव हो सकते हैं।" भाजपा का मजबूत संगठन है और उसने गैर-जाटव दलितों व गैर-यादव ओबीसी में भारी निवेश किया है। वहीं सपा यूपी में मुख्य विपक्षी दल बनी हुई है। कांग्रेस को 2027 में बसपा के कमजोर होने और सपा से सीट बंटवारे के बीच अपना दलित बेस दोबारा खड़ा करना होगा।

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