हरित बरेका : पर्यावरण संग प्रगति का संकल्प

मुड़कर नहीं देखा और आज उच्च अश्व शक्ति विद्युत इंजन 

हरित बरेका : पर्यावरण संग प्रगति का संकल्प

23 अप्रैल 1956 को बनारस रेल इंजन कारखाना की स्थापना एवं 1961 में उत्पादन शुरू होने के उपरांत 3 जनवरी 1964 में प्रथम डीजल-विद्युत रेल इंजन लाल बहादुर शास्त्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया

बनारस। 23 अप्रैल 1956 को बनारस रेल इंजन कारखाना की स्थापना एवं 1961 में उत्पादन शुरू होने के उपरांत 3 जनवरी 1964 में प्रथम डीजल-विद्युत रेल इंजन लाल बहादुर शास्त्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके साथ ही बनारस रेल इंजन कारखाना ने घरेलू विनिर्माण उद्योग में प्रवेश किया। अब तक बरेका भारतीय रेलवे, इस्पात संयंत्रों,  खानों, बंदरगाहों और निर्यात के लिए 10770 से अधिक लोकोमोटिव बना चुका है। यह भारत का अग्रणी रेल इंजन विनिर्माता बन गया है। 

बनारस रेल इंजन कारखाना के रूप में 27 अक्टूाबर 2020 से पुन: नामित यह सिंगल कॉम्पैक्ट असेंबली लाइन के साथ भारत की सबसे बड़ी मल्टी गेज, मल्टी ट्रैक्शिन लोकोमोटिव निर्माण इकाई है। बहुमुखी प्रतिभाशाली श्रमशक्ति से युक्ती बरेका ने 2017 से पर्यावरण अनुकूल, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और होटल लोड कन्वर्टर जैसी विशेषताओं से युक्त ऊर्जा दक्ष विद्युत रेल इंजन बनाने की यात्रा शुरू की तथा कभी पीछे

मुड़कर नहीं देखा और आज उच्च अश्व शक्ति विद्युत इंजन 
बनाने वाली इकाई में बदल गया। बरेका निर्मित लोकोमोटिव न केवल भारत में, बल्कि पूरे एशिया और अफ्रीका के कई अंतरराष्ट्रीय रेलवे प्रणालियों, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, तंजानिया, सूडान, सेनेगल, माली, मलेशिया, वियतनाम, अंगोला और मोजाम्बिक में सेवाएं प्रदान करते हैं। 

डीजल रेल इंजनों का निर्माण बंद
कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और ग्रीन ट्रेक्शन प्रदान करने के लिए बरेका ने भारतीय रेलवे के लिए डीजल रेल इंजनों का निर्माण बंद कर दिया है। बरेका पौराणिक नगर वाराणसी में स्थित एक अग्रणी औद्योगिक इकाई है। यह अपने वृहत्तर सामुदायिक उत्तरदायित्व विशेष रूप से पवित्र नदी गंगा के प्रति हमेशा जागरूक रहा है। पर्यावरण संरक्षण में नेतृत्वकारी भूमिका का निर्वहन करते हुए बरेका ने 1980 के दशक में ही दो ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए। मानव अपशिष्ट के उपचार के लिए 12 एमएलडी क्षमता युक्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, एसटीपी तथा दूषित एवं मिश्रित पेट्रोलियम तेल और लुब्रिकेंट, पीओएल के उपचार के लिए 3 एमएलडी क्षमता युक्त औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र, आईईटीपी स्थापित किया गया। 2024-25 के दौरान एसटीपी ने 1405 मिलियन लीटर पानी का उपचार किया। 

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43 गहरे रिचार्ज कुओं का निर्माण 
बरेका जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण के लिए प्रतिबद्ध है।  इसके अंतर्गत इस वर्ष 10 गहरे रिचार्ज कुओं के निर्माण सहित कुल 43 गहरे रिचार्ज कुओं का निर्माण किया गया। इससे न केवल जल जमाव की समस्या से निजात मिलेगी बल्कि भूजल स्तर का रिचार्ज भी होगा, फलस्वरूप लगातार नीचे जा रहे जल स्तर पर रोक भी लगेगी । बरेका अपने कार्बन फुट प्रिंट को कम करके उच्च उत्पादकता प्राप्त करने के लिए पर्यावरण के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यावरण के क्षेत्र में बरेका को पहले ही आईएसओ 14001:2015 जैसा आईएसओ प्रमाणन प्राप्त है।

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बरेका में स्थापित सौर उपकरण: ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए और गैर-पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों के लाभों के लिए बरेका ने ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। बरेका ने विभिन्न स्थानों पर 3.86 मेगावाट की क्षमता के ग्रिड से जुड़े हुए सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। बरेका ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4226102 किलोवाट हरित सौर ऊर्जा उत्पन्न की है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बन उत्सर्जन में 3465 टन की कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बरेका में कुल ऊर्जा खपत में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 20.80 प्रतिशत है। बरेका पहली उत्पादन इकाई है जहां ऊर्जा खपत की निगरानी और ऊर्जा उपयोग को अनुकूलित करने के लिए सामान्य सेवाओं में एससीएडीए प्रणाली चालू की गई। बाल निकेतन स्कूल भवन को मेसर्स ब्यूरो आॅफ एनर्जी एफिशिएंसी, नई दिल्ली द्वारा जीरो प्लस प्रमाण पत्र प्रदान किया गया तथा बरेका को वित्तीय वर्ष 2024-25 में कार्यशाला क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण के लिए किए गए सराहनीय कार्य के लिए 14 दिसंबर 2024 को यूपीएनईडीए द्वारा एक खुली प्रतियोगिता के माध्यम से प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत बरेका कंचनपुर कॉलोनी में एक जल संचयन तालाब का निर्माण किया गया। इस तालाब का की जल संग्रहण क्षमता 311 लाख लीटर है। बरेका परिसर में 1,00,000 से अधिक छोटे-बड़े पेड़ हैं। इससे बरेका का लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र हरा-भरा है।

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एक पेड़ मां के नाम लगाओ अभियान के अंतर्गत बरेका में बृहद पौधा रोपण किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में बरेका में 2051 पेड़ लगाए गए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापित मानकों के अनुसार बरेका चिकित्सालय से उत्पन्न हो रहे बायो-मेडिकल कचरे का सफलतापूर्वक निस्ताथरण किया जा रहा है तथा इस पर आधुनिकतम प्रौद्योगिकी द्वारा निगरानी भी बरती जा रही है । बरेका अपने हरे-भरे एवं स्वच्छ पर्यावरण से स्वस्थ जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है। बरेका अपनी प्रत्येक गतिविधि में पर्यावरण की अनुकूलता के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहते हुये स्वच्छ एवं हरित भारत के लिए योगदान देता रहेगा।

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