इसरो का बड़ा मिशन तैयार! 4 सितंबर तड़के GSLV-F17 से EOS-05 का प्रक्षेपण, अंतरिक्ष निगरानी को मिलेगी नई ताकत
भू-समकालिक कक्षा में भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट
चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारी क्षमता वाले स्वदेशी जीएसएलवी रॉकेट से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 का प्रक्षेपण चार सितंबर की तड़के 02:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा। इसरो ने सोशल मीडिया एक्स पर आधिकारिक तौर पर मंगलवार को इसकी घोषणा की। इसरो ने लिखा, "जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन चार सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार तड़के 02:55 बजे देश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, एसएचएआर, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण के लिए निर्धारित है।" इससे पहले, मिशन की घोषणा करते समय इसरो ने प्रक्षेपण की तारीख नहीं बतायी थी, जिसकी पुष्टि आज उसने आधिकारिक तौर पर कर दी।
क्रायोजेनिक तीसरे ऊपरी चरण में खराबी के कारण जीएसएलवी-एफ10 के 12 अगस्त 2021 को जीसैट-1 का मिशन विफल रहने के लगभग पांच वर्ष बाद, इसरो ईओएस-05 अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण करेगा, जिसे जीसैट-1ए के नाम से भी जाना जाता है। हैवी लिफ्ट प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-मार्क-2 का उपयोग करते हुए यह सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (सब-जीटीओ) से संचालित होने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह होगा।
दूसरे लॉन्च पैड से यह प्रक्षेपण चार सितंबर की तड़के 02:55 बजे होगा और एक छोटे अंतराल के बाद शुरू किये जा रहे इस मिशन के लिए तैयारियां चल रही हैं। ईओएस-05 को भारत के जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लॉन्च ह्वीकल (जीएसएलवी) की 19वीं उड़ान जीएसएलवी-एफ17 से प्रक्षेपित किया जायेगा और जीएसएलवी-एफ17 पेलोड फेयरिंग का विन्यास चार मीटर व्यास वाला ओजीव (कंपोजिट) संस्करण है। तीन चरणों वाले 51.7 मीटर ऊंचे जीएसएलवी-एफ17 का प्रक्षेपण द्रव्यमान 420.5 टन है। यह रॉकेट ईओएस-05 उपग्रह को उप-भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (उप-जीटीओ) में स्थापित करेगा। प्रक्षेपण के बाद 2,367 किलोग्राम वजनी अंतरिक्ष यान को उप-जीटीओ में स्थापित किया जाएगा। इस कक्षा में इसकी पेरिजी (निकटतम बिंदु) 170 किलोमीटर और एपोजी (दूरस्थ बिंदु) 28,934 किलोमीटर होगी। भूमध्य रेखा के सापेक्ष इसकी कक्षीय झुकाव लगभग 19.28 डिग्री (प्लस या माइनस एक डिग्री) रहेगा।
उन्होंने कहा, "ईओएस-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन अंतरिक्ष यान है। यह भू-समकालिक कक्षा से भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है।" ईओएस-05 को पृथ्वी की विस्तृत तस्वीरें लेने और निगरानी एवं अन्य अनुप्रयोगों के लिए डेटा प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें भूमि और पर्यावरण के नियमित अवलोकन की आवश्यकता होती है। इसका उद्देश्य मौजूदा रिमोट सेंसिंग क्षमताओं को बेहतर बनाना है। जीसैट को मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है, ताकि साफ मौसम (बादल-मुक्त परिस्थितियों) में लगातार अंतराल पर देश के बड़े हिस्से की लगभग रियल-टाइम तस्वीरें मिल सकें। 42 मीटर (138 फुट) स्पैटियल रिजॉल्यूशन के साथ यह हर पांच मिनट में चुने हुए क्षेत्र की और हर 30 मिनट में पूरे भारतीय भूभाग की तस्वीर ले सकता है।"
यह ईओएस-05 जीसैट-1ए का स्थान लेगा, जो 2021 में मिशन विफल हो कर नष्ट हो गया था और 2025 तथा 2026 की शुरुआत में पीएसएलवी मिशन की लगातार दो विफलताओं के बाद इस प्रस्तावित मिशन पर बारीकी से नजर रखी जायेगी। प्रक्षेपण यान से जुड़ी गड़बड़ियों के कारणों की जांच के लिए प्रक्षेपणों को अस्थायी रूप से रोकने के बाद इसरो ने इस मिशन में कदम बढ़ाया है। विफलताओं ने चिंताएं बढ़ा दी थीं, जिससे जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि अंतरिक्ष एजेंसी अपने प्रक्षेपण कार्यक्रम में विश्वास मजबूत करना चाहती है। इस उपग्रह से पृथ्वी की इमेजिंग में भारत की क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
यह मिशन भारत के विस्तार लेते अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके साथ ही, राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए तेजी से उन्नत होती उपग्रह प्रणालियों को तैनात करने की देश की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।

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