मूल मुंबईकर शहर से नहीं होंगे विस्थापित : फडणवीस का ऐलान, 2029 तक बदल जाएगी 3 बीडीडी चॉल की तस्वीर
मुंबई के चॉलवासियों को मिला घर
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मूल मुंबईकरों को शहर से विस्थापित नहीं किये जाने के प्रति आश्वस्त करते हुए कहा है कि राज्य सरकार विभिन्न पुनर्विकास परियोजनाओं के माध्यम से उन्हें उनके मौजूदा स्थानों पर ही स्थायी और बड़े आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। फडणवीस ने शनिवार को यहां यशवंतराव चव्हाण केंद्र में महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) की ओर से संचालित एनएम जोशी मार्ग-लोअर परेल बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना के पहले चरण के तहत तीन तैयार इमारतों के पात्र निवासियों को 557 पुनर्वास फ्लैटों का कब्जा सौंपने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ प्रतीकात्मक रूप से 11 लाभार्थियों को फ्लैटों की चाबियां और कब्जा पत्र सौंपे।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुंबई के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में योगदान देने वाले लोग बेहतर आवास सुविधाओं के साथ शहर में ही रह सकें। उन्होंने घोषणा की कि नायगांव, एनएम जोशी मार्ग-लोअर परेल और वर्ली में तीन बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजनाओं के तहत सभी 15,804 पुनर्वास आवासों का निर्माण दिसंबर 2029 तक पूरा कर लिया जायेगा। परियोजना के व्यापक आकार और जटिलता को देखते हुए सरकार ने इसका पुनर्विकास निजी डेवलपरों के बजाय जानबूझकर म्हाडा को सौंपा गया था। इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि उन निवासियों को गुणवत्तापूर्ण आवास और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिन्होंने मुंबई की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखा है।
बीडीडी चॉल के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए श्री फडणवीस ने कहा कि इन आवासीय परिसरों ने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन सहित कई महत्वपूर्ण घटनाओं तथा विभिन्न श्रमिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्षों को देखा है। भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और लोकमान्य तिलक भी इन ऐतिहासिक परिसरों में रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न डेवलपरों के प्रयासों के बावजूद पुनर्विकास का प्रस्ताव कई वर्षों तक लंबित रहा। निजी डेवलपरों के माध्यम से इतनी बड़ी परियोजना को पूरा करने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने अंतत: म्हाडा को कार्यान्वयन एजेंसी नियुक्त करने का फैसला किया। इस फैसले के बाद 2017-18 में पुनर्विकास का काम शुरू हुआ। कई बाधाओं के बावजूद सरकार ने परियोजना का काम जारी रखा और बाद में इसकी गति तेज की।
फडणवीस ने कहा कि कई परिवार दो से तीन पीढिय़ों से लगभग 160 वर्ग फुट के छोटे घरों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में रह रहे थे। पुनर्विकास योजना के तहत पात्र निवासियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त 500 वर्ग फुट के बड़े घर दिये जा रहे हैं। नये फ्लैटों में एक बैठक कक्ष और दो शयनकक्ष हैं, जिससे परिवारों को बेहतर रहने की परिस्थितियां और आने वाली पीढिय़ों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। बीडीडी चॉल में रहने वाले पुलिसकर्मियों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का 2011 से पहले वहां रह रहे पात्र पुलिसकर्मियों को 15 लाख रुपये में आवास देने का फैसला बरकरार है। उन्होंने कहा कि 2011 की कटऑफ तारीख के मानदंडों के तहत अपात्र हो गये कुछ पुलिसकर्मियों के मामलों पर भी विशेष प्रकरण के रूप में विचार किया जायेगा और उन्हें निर्माण लागत पर आवास उपलब्ध कराया जाएगा। कीमतों में विसंगतियों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बैठक भी बुलायी जायेगी। उन्होंने लाभार्थियों से अपने नये आवास नहीं बेचने की अपील की और कहा कि वे इन फ्लैटों को पारिवारिक संपत्ति मानें तथा आकर्षक प्रस्ताव मिलने के बावजूद कम से कम अगली दो से तीन पीढिय़ों तक इन्हें सुरक्षित रखें।
उपमुख्यमंत्री एवं आवास मंत्री एकनाथ शिंदे ने म्हाडा और संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को निर्माण की गुणवत्ता तथा बुनियादी सुविधाओं से समझौता किए बिना पुनर्विकास कार्य समय पर पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास आवासों में भी बिक्री के लिए विकसित की जा रही महंगी आवासीय संपत्तियों के समान सुविधाएं और निर्माण मानक होने चाहिए। शिंदे ने कहा कि क्लस्टर पुनर्विकास का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत आवास उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बेहतर सुविधाओं वाले संपूर्ण आवासीय क्षेत्र विकसित करना है। ऐसी परियोजनाओं में उद्यान, खुले स्थान, जिम, बच्चों के खेल के मैदान और अन्य नागरिक सुविधाओं सहित 23 श्रेणियों की सुविधाएं शामिल हैं।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना को लेकर हुए आंदोलन के दौरान युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि म्हाडा और झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) की लंबित पुनर्विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए सरकार ने एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन विनियम (यूडीसीपीआर) के प्रावधानों में संशोधन किया है। इससे मुंबई को झुग्गी मुक्त बनाने के प्रयासों में तेजी आयेगी। शिंदे ने कहा कि पुनर्वास आवासों का निर्माण पूरा होने के साथ ही निवासियों को उनके लंबित किराये का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाये जा रहे हैं। मुंबई में सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाने के प्रयासों के तहत सरकार करीब 300 एकड़ में विश्वस्तरीय उद्यान विकसित करने की योजना बना रही है। इसमें रेसकोर्स की 125 एकड़ और कोस्टल रोड के किनारे की लगभग 150 एकड़ जमीन शामिल होगी। उन्होंने कहा कि सरकार महानगर में जीवन की समग्र गुणवत्ता सुधारने के लिए आवास की जरूरतों, बुनियादी ढांचे के विकास और खुले स्थानों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने दिवाली के त्योहार के दौरान 557 परिवारों को घरों का कब्जा सौंपे जाने को उनके लिए यादगार अवसर बताया। उन्होंने कहा कि धनतेरस और दिवाली के दौरान अपने स्थायी घरों में प्रवेश करने से लाभार्थियों की खुशियां दोगुनी हो गयी हैं। उन्होंने पिछले वर्ष दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा बीडीडी चॉल में आयोजित चाबी वितरण कार्यक्रम को याद करते हुए कहा कि यह अवसर निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पवार ने कहा कि मुंबई के विकास में श्रमिकों, मजदूरों, मध्यमवर्गीय परिवारों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों के योगदान तथा उनकी रहने की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने परिवारों से नये घरों में जाने के बाद बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने तथा लड़कियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने की अपील की। बीडीडी चॉल की विशिष्ट संस्कृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाई, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग यहां पीढिय़ों से साथ रहते आये हैं और उन्होंने सामुदायिक भावना तथा आपसी सहयोग की परंपरा बनाये रखी है। उन्होंने निवासियों से नये भवनों में जाने के बाद भी एकता, सामूहिक उत्सवों और मानवीय मूल्यों की इस परंपरा को कायम रखने की अपील की।

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