उमर अब्दुल्ला ने वांगचुक के अनशन पर उठाएं सवाल : केंद्र सरकार इस मुद्दे पर चिंतित नहीं, कहा- राजनीति में मानवता के लिए होना चाहिए स्थान

राजनीति को कभी भी मानवता पर नहीं होना चाहिए हावी

उमर अब्दुल्ला ने वांगचुक के अनशन पर उठाएं सवाल : केंद्र सरकार इस मुद्दे पर चिंतित नहीं, कहा- राजनीति में मानवता के लिए होना चाहिए स्थान
वांगचुक की 19 दिन से जारी भूख हड़ताल पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है, फिर भी सरकार बातचीत नहीं कर रही। उमर ने अन्ना हजारे आंदोलन का उदाहरण देते हुए राजनीति से ऊपर मानवता और करुणा को प्राथमिकता देने की अपील की।

जम्मू। कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर चिंतित नहीं है। अब्दुल्ला ने कहा, उन्हें भूख हड़ताल पर बैठे 19 दिन हो गये हैं। जहां तक मैं जानता हूं, उनकी केवल एक ही मांग है कि नीट प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में शिक्षा मंत्री को या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या उन्हें उनके पद से हटा दिया जाना चाहिए। वांगचुक का वजन पहले ही लगभग 9 किलोग्राम कम हो चुका है और यह उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। ऐसा लगता है कि सरकार टस से मस नहीं हो रही है और ही उनसे अपना उपवास समाप्त करने की अपील कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति को कभी भी मानवता और करुणा पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, राजनीति में मानवता और दया के लिए स्थान होना चाहिए।

अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से तुलना करते हुए उमर ने कहा कि तत्कालीन केंद्र सरकार ने भूख हड़ताल के दौरान दिग्गज कार्यकर्ता से बातचीत करने के लिए मंत्रियों को भेजा था। उन्होंने कहा, जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब अन्ना हजारे से बात करने और उन्हें अपना उपवास समाप्त करने के लिए मनाने के लिए मंत्रियों को भेजा गया था। अब तक वांगचुक से बातचीत करने का ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वे नहीं जानते कि सरकार भविष्य में इस मुद्दे पर क्या करेगी, लेकिन वे सोनम के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई लोग वांगचुक के साथ इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं क्योंकि उनका मानना है कि न्याय की मांग पूरी तरह से जायज है। उन्होंने कहा, उनकी मांग गलत नहीं है, लेकिन दुर्भाग्य से सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।

मुख्यमंत्री ने उन राजनीतिक नेताओं की भी आलोचना की जो उनके चाचा मुस्तफा कमाल के निधन के बाद उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने आये थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस पर भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा यदि लोग संवेदना व्यक्त करने आते हैं, तो उन्हें बाहर राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह अजीब लगता है, और मैं यहां राजनीति पर चर्चा नहीं करूंगा।

 

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