सुरेश कलमाडी के निधन से खेल जगत में शोक की लहर, लम्बे समय तक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में किया कार्य
वह 81 वर्ष के थे
भारतीय खेल प्रशासन के दिग्गज और पूर्व आईओए अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार तड़के पुणे में 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय तक आईओए अध्यक्ष रहे और अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके कार्यकाल में भारत ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता और दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का आयोजन किया।
नई दिल्ली। भारतीय खेल प्रशासन के दिग्गज और लंबे समय तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष रहे सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार तड़के पुणे के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। परिवार वालों के मुताबिक, कलमाड़ी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और सुबह करीब साढ़े तीन बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
परिवार में शोक : सुरेश कलमाड़ी अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र, बहू, दो विवाहित बेटियां, एक दामाद और नाती-पोतों से भरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
लंबे समय तक रहे आईओए अध्यक्ष :
कलमाड़ी भारतीय खेल प्रशासन में एक प्रभावशाली चेहरा रहे। उन्होंने 1996 से 2011 तक आईओए अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और इस दौरान वह देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आईओए अध्यक्षों में शामिल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय खेलों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया।
भारत-पाक युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई :
1944 में जन्मे सुरेश कलमाड़ी ने अपने करियर की शुरूआत भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट के रूप में की थी। उन्होंने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं में भी मजबूत पकड़ :
आईओए के अलावा कलमाड़ी ने एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और इंटरनेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन (आईएएएफ) काउंसिल के सदस्य के रूप में भी काम किया। इस वजह से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सबसे प्रभावशाली खेल प्रशासकों में गिने जाते थे।
बीजिंग ओलंपिक और कॉमनवेल्थ 2010 से जुड़ा नाम :
कलमाड़ी के आईओए कार्यकाल में भारत ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब अभिनव बिंद्रा ने देश को पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया। इसके अलावा, 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स की आयोजन समिति के वह चेयरमैन भी रहे, जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई।
पुणे के खेल विकास में अहम योगदान :
सुरेश कलमाड़ी का पुणे के खेल ढांचे के विकास में भी बड़ा योगदान रहा। पुणे इंटरनेशनल मैराथन जैसी पहलें उनके प्रयासों का ही परिणाम थीं, जो आगे चलकर भारतीय रोड रनिंग कैलेंडर का अहम हिस्सा बनीं।

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