संस्कृत विश्वविद्यालय के हाल का मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया प्रसंज्ञान : हायक कुलसचिव के 4 पद स्वीकृत, 2 पद भरे हुए; एक शिक्षा मंत्री के पास प्रतिनियुक्ति पर
विश्वविद्यालय कार्यवाहक कुलगुरु प्रो.नन्दकिशोर पाण्डे के भरोसे चल रहा
विश्वविद्यालय में स्टाफ संकट गहराया—38 में से 29 पद खाली, कामकाज ठप। दैनिक नवज्योति की खबर पर सीएमओ ने मांगी रिपोर्ट। विश्वविद्यालय ने माना—एक सहायक कुलसचिव शिक्षा मंत्री कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर। इससे प्रशासन, आरटीआई और विधानसभा कार्य प्रभावित, जवाबों में देरी पर फटकार भी लग चुकी है।
जयपुर। दैनिक नवज्योति में-संस्कृत विश्वविद्यालय का बुरा हाल, 38 पद, 29 खाली और एक कुलसचिव प्रतिनियुक्ति पर शीर्षक से प्रकाशित समाचार के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रसंज्ञान लेते हुए संस्कृत शिक्षा विभाग के माध्यम से संस्कृत विश्वविद्यालय से तथ्यात्मक टिप्पणी मांगी है। जिसमें संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपनी टिप्पणी में खाली पदों की वस्तुस्थिति का विवरण देते हुए बताया है कि ‘एक सहायक कुलसचिव शिक्षा मंत्री के कार्यालय में विशेषाधिकारी के रूप में व्यवस्थार्थ नियुक्त हैं।’ दैनिक नवज्योति ने 11 नवम्बर, 2025 के अंक में बताया था कि ‘जगद्गुरु रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय ना सिर्फ विद्यार्थियों को तरस रहा है बल्कि अशैक्षणिक 38 पदों में से 29 पद रिक्त हैं। विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक, उपकुलसचिव के चार पदों में से दो भरे हुए हैं, जिसमें से एक सहायक कुलसचिव शिक्षा मंत्री के पास प्रतिनियुक्ति पर हैं। कुलपति प्रो.रामसेवक दुबे के कार्यकाल के पूरा होने के बाद से विश्वविद्यालय कार्यवाहक कुलगुरु प्रो.नन्दकिशोर पाण्डे के भरोसे चल रहा है।’
सहायक कुलसचिव के प्रतिनियुक्ति पर होने से कामकाज ठप: संस्कृत विश्वविद्यालय के सूत्रों के अनुसार सहायक कुलसचिव विजय नारायण के प्रतिनियुक्ति पर होने से सामान्य प्रशासन, आरटीआई, विधानसभा सहित अन्य कार्य बाधित हो रहे हैं। विधानसभा के प्रश्नों के देरी से जवाब देने पर विधानसभा अध्यक्ष और मुख्य सचिव ने भी संस्कृत शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लताड़ लगाई थीं। आरटीआई के जवाब भी समय पर नहीं मिलने से आवेदक परेशान हैं और उनकी आयोग में अपील करते हैं।
इनका कहना है...
शिक्षा विभाग ने सीएमओ के निर्देश पर तथ्यात्मक टिप्पणी चाही गई थी, यह सही है कि पद खाली हैं, बिना कर्मचारियों के कार्य प्रभावित होता है।
-गुंजन सोनी, रजिस्ट्रार जगद्गुरु रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिना कर्मचारियों के चल रहे विश्वविद्यालय में भी कर्मचारियों को शिक्षा मंत्री के पास प्रतिनियुक्ति पर लगा रहा है, विश्वविद्यालय के अनेक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
-महेश चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष, एनएसयूआई

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