भारतीय कंपनियों को भी झटका: ईरान से लड़ाई के बीच ट्रंप ने किया टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव, मेटल और फार्मा सेक्टर पर लगाया 50% टैरिफ

ट्रंप का 'टैरिफ' प्रहार: भारतीय निर्यातकों की बढ़ी मुश्किलें

भारतीय कंपनियों को भी झटका: ईरान से लड़ाई के बीच ट्रंप ने किया टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव, मेटल और फार्मा सेक्टर पर लगाया 50% टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील और एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ बरकरार रखते हुए नए आयात नियम लागू किए हैं। 15% से अधिक धातु वाले उत्पादों पर 25% टैक्स लगेगा। 2027 तक प्रभावी इन नियमों का उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना है, जिससे भारत से होने वाला निर्यात महंगा होना तय है।

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय कंपनियों को झटका देते हुए बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर के आयात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कहा है कि कच्चे स्टील और एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ पहले की तरह ही लागू रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ये कदम अमेरिकी इंडस्ट्री को मजबूत बनाने और टैक्स सिस्टम को आसान करने के लिए उठाया गया है। इसके एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने ईरान युद्व को समाप्त करने की बात कही थी। 

हाल ही में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप को झटका देते हुए पहले लगाए गए टैरिफ को पूरी तरह से रद्द कर दिया था, लेकिन अब नए नियमों के तहत जो प्रोडक्ट सीधे मेटल नहीं हैं, बल्कि उनसे बने हुए है यानि किसी प्रोडक्ट में स्टील, एल्युमीनियम या कॉपर की मात्रा 15% से कम है, तो उस पर अब से टैरिफ नही लगेगा। अगर किसी भी प्रोटक्ट को बनाने में इन सभी धातुओं की मात्रा 15 प्रतिशत से अधिक है तो उस पर करीब 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। नए ​नियमों के अनुसार, कुछ खास इंडस्ट्रियल मशीनों और इलेक्ट्रिकल उपकरणों पर टैरिफ को घटाकर 15% किया गया है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि नए नियम साल 2027 तक लागू रहेंगे। इसका मकसद केवल और केवल अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है और कुछ नहीं। इसके अलावा ट्रंप ने कहा कि यदि को प्रोडक्ट विदेश में बना हुआ है और उसमें इन सभी धातुओं की मात्रा मिली हुई है तो उस पर 10 प्रतिशत टैरिक लगेगा। अमेरिका के इस नए नियम का असर अब भारत पर भी दिखाई देगा। नए नियमों के अनुसार, भारत जैसे देशों के लिए अमेरिकी बाजार में भी निर्यात महंगा हो सकता है। 

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