'मेरे घर के 10 लोग मर गए...'1984 के सिख विरोधी दंगों के एक केस में सज्जन कुमार को बड़ी राहत, कोर्ट का फैसला सुनते ही रो पड़ीं बागी कौर
1984 सिख दंगा केस में सज्जन कुमार बरी
राउज एवेन्यू कोर्ट ने जनकपुरी-विकासपुरी मामले में सज्जन कुमार को बरी किया। पीड़ित परिवार निराश हुआ, हालांकि अन्य केस में उम्रकैद के चलते वह जेल में रहेंगे।
नई दिल्ली। साल 1984 के सिख नरसंहार से जुड़े जनकपुरी, विकासपुरी मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को बड़ी राहत देते हुए उनको बरी कर दिया है। हालांकि, सज्जन कुमार जेल में ही रहेंगे क्योंकि वो 1984 दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में कोर्ट ने उनको उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस हिंसा मामले मे दो लोगों की मौत हुई थी। बता दें कि जैसे ही कोर्ट ने ये फैसला सुनाया तो इस फैसले को सुनते ही पीड़ित परिवार को तगड़ा झटका लगा और पीड़ित परिवार की सदस्य बागी कौर रोने लगी और कहने लगी इतने सालों बाद भी हमें न्याय के मंदिर से इंसाफ नहीं मिला। ना जाने हमें इंसाफ कब मिलेगा? या फिर मिलेगा भी या नहीं? बता दें कि दिसंबर 2025 में विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने केस की सुनवाई के दौरान फैसले को सुरक्षित रखा था जिसको आज सुनाया गया है।
बता दें कि पीड़ित बागी कौर ने रोते हुए मीडिया से कहा कि हमें आज तक इंसान नहीं मिला है और उस हमले में मेरे परिवार के करीब 10 लोगों की मौत हुई थी। इसके आगे बागी कौर ने कहा कि इस न्याय के मंदिर से उनको इंसान नहीं मिला लेकिन वो अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। इसके साथ ही बागी कौर ने कहा यदि सज्जन कुमार दोषी नहीं था तो कोर्ट ने उनको आज तक जेल में क्यों बंद रखा था।
1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में पूर्व सांसद सज्जन कुमार के वकील अनिल कुमार शर्मा ने कहा, "कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है क्योंकि विकासपुरी और जनकपुरी मामलों में उनके खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका। हमने कोर्ट को बताया था कि उन्हें टारगेट किया गया था, क्योंकि उनकी मौजूदगी साबित नहीं हो सकी। अब तक किसी भी गवाह ने उनका नाम नहीं लिया था, लेकिन अब 36 साल बाद इन्होंने नाम लिया है।"
आखिर क्यों भड़के थे 1984 में सिख विरोधी दंगे?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आखिरकार साल 1984 में दंगे क्यों भड़के थे। दरअसल, 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी को उनके ही सिख बॉर्डीगार्डो ने ही गोेलीमार कर हत्या कर दी थी, जिसके बाद सिखो के विरोध में पूरे देश में दंगे भड़क गए थे।

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